मौसम का गिरा पारा,ठंड का असर बरकरार, जनजीवन अस्त ब्यस्त

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

-पाले के कारण खरीफ की फसल हो रही खराब
-ग्रामीण क्षेत्रों में ठण्ड से बचने के नही किये गए कोई उपाय

विंढमगंज। बुजुर्गो की माने तो इससे पहले कभी नहीं रही ऐसी ठिठुरन, न ही देखी गई। आसमान साफ होने के बावजूद सर्दी का सितम इस कदर है की जिस्म से रूह तक कांप उठी है।बावजूद प्रसाशन कुम्भकर्णी नींद सो रहा रहा है।अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में न ही अलाव की व्यवस्था की गई न ही प्रसाशन स्तर पर ठण्ड से बचाव के कोई उपाय किये गये। पिछले कई दिनों से बर्फीली हवाओं के बीच मौसम के पारे का लुढ़कना जारी है। लिहाजा चटख धूप खिलने के बाद भी ठिठुरन व गलन बढ़ती ही जा रही है। रात के समय पाला गिरने से फसलों और मवेशियों पर संकट बन आया है। इस बीच आज पुरे जिले का तापमान गिरा रहा ।कोहरे से हैरान रहे जनजीवन के सामने अब पाले का संकट है। चटख धूप के साथ होने वाली सुबह कड़ाके की सर्दी से राहत देने में नाकाम है।बर्फीली हवाओं के थपेड़ों ने आम-खास सबको हिला कर रख दिया है। गलन के कारण हाथों की उंगलियां अकड़ने लगी हैं तो अलाव व हीटर का सहारा लिया जा रहा है। दिनभर किसी तरह बिताने के बाद शाम ढलते ही सर्दी का असर दिखना सुरु हो जा रहा है।सुबह होते ही फसलों और घास पर पाले की चादर से फसलें ढक जा रही है। किसानों को सर्दी के साथ ही फसलों पर पाले का संकट भी सताने लगी है। पाले के चलते फसलें खराब होने लगी हैं। सबसे ज्यादा असर सरसों, आलू व चना-मटर की फसलें खराब हो रही है।


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