इस व्रत को करने से कुंडली के सारे दोष हो जातें हैं दूर

मार्गशीर्ष माह में अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। यह अमावस्या सुख-सौभाग्य प्राप्ति के लिए विशेष मानी जाती है। इस अमावस्या पर पावन नदी में स्नान और तीर्थक्षेत्र में दान का विशेष महत्व है। पितरों की पूजा के लिए इसे विशेष दिन माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजन करने से पितृ दोष दूर हो जाते हैं। कुंडली में पितृ दोष हो या संतानहीन योग हो तो उनको यह उपवास अवश्य रखना चाहिए।

अगहन माह में ही भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का दिव्य ज्ञान दिया था। अगहन अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे कड़वे तेल का दीया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि अमावस्या पर दान करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती है। अमावस्या पर भूखे को भोजन कराने से कभी शारीरिक व्याधियां नहीं होती हैं। इस अमावस्या पर भगवान श्री हरि विष्णु के मंदिर में पीले रंग का ध्वज अर्पित करें। मार्गशीर्ष अमावस्या माता लक्ष्मी को प्रिय है, इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन और व्रत करना चाहिए। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा का विधान है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा करने या कथा का श्रवण करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या पर शिवालय में जाकर भगवान शिवशंकर का कच्चे दूध, दही से अभिषेक करें। अमावस्या पर संध्या के समय शिव मंदिर में गाय के घी का दीपक जलाएं। अमावस्या पर ब्राह्मणों को सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराएं। मार्गशीर्ष अमावस्या का व्रत करने कुंडली के दोष दूर हो जाते हैं।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



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