सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार कौन?

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

ट्रैफिक में लगे ज्यादातर पुलिस पुलिसकर्मी अनट्रेंड

● मुख्यालय पर नहीं दिखता कोई ट्रैफिक प्लान

● नवागत एसपी खुद ट्रैफिक दुर्व्यवस्था के हैं भुक्तभोगी, मगर फिर भी नहीं सुधरी सोनभद्र की ट्रैफिक व्यवस्था

● पूरे दिन पटरियों पर खड़ी रहती है ट्रकें

● आखिर क्यों नहीं दिखती ट्रैफिक पुलिस को पटरियों पर खड़ी ट्रकें

● जब तक नहीं सुधरेगी ट्रैफिक व्यवस्था, होती रहेंगी सड़क दुर्घटनाएँ

सोनभद्र । नवागत एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह में चार्ज संभालते ही सबसे पहले प्रेस से मुखातिब हुए । उन्होंने पहले दिन ही अपनी प्राथमिकता बता दी थी कि जनपद में कानून का राज होगा । साथ ही उन्होंने जनपद में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चर्चा की और कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के साथ सहज बनाया जाएगा ताकि दुर्घटनाओं के आंकड़ों में कमी आ सके । लेकिन सोनभद्र मुख्यालय की बात करें तो सड़कों की दुर्दशा व लचर ट्रैफिक व्यवस्था के चलते न सिर्फ दुर्घटनाएं हो रही हैं बल्कि हर रोज दोपहिया वाहन व साइकिल सवार जान जोखिम में डालकर सड़कों पर चल रहे हैं । छपका से लेकर फ्लाईओवर तक सड़कों की पटरियां गायब हैं । जो पटरी राहगीरों व साइकिल सवारों के लिए बनाई गई है वह अतिक्रमण की चपेट में है । उन पटरियों के अलावा सड़क का एक बड़ा हिस्सा भी बड़े वाहनों द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है।

दरअसल सड़क के किनारे दिन हो या फिर रात बड़ी संख्या में दोनों तरफ ट्रकें खड़ी रहती हैं। ट्रकों की संख्या ज्यादा होने के कारण लाइन लगी रहती है। इनमें कुछ ट्रकें बालू-गिट्टी लोड होती हैं जो सड़क पर खड़ी कर अपनी दुकान खोल देते हैं और ग्राहकों को सड़क पर ही माल दिखाकर बेचते हैं। वहीं कुछ ट्रकें होटलों पर खाना खाने के बहाने सुबह से शाम तक खड़ी किये रहते हैं। किलर रोड के नाम से मशहूर सोनभद्र की सड़क का इसी वजह से चौड़ीकरण किया गया था कि दुर्घटना में कमी आएगी लेकिन यहां सड़क चौड़ीकरण के बाद दुर्घटनाएं और बढ़ गयी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बालू या गिट्टी लोड ट्रकें जिस स्थान पर खड़ी रहती है वहाँ गंदगी करने के साथ ही ट्रक से बालू व गिट्टी गिरता रहता है जो गाड़ी हटने के बाद दुपहिया वाहन के लिए जान का खतरा बन जाता है।

आप इन तस्वीरों में भी साफ देख सकते हैं कि सड़कों पर किस तरह गिट्टी व बालू फैला पड़ा है। लोगों का कहना है कि कई मिस्त्री भी सड़कों पर अपनी दुकान चलाते हैं और गाड़ी हटने के बाद गंदगी वहीं छोड़ कर चले जाते है।

इन्हीं सब कारणों से शुक्रवार को उरमौरा में ट्रक से कुचलकर एक मजदूर की मौत हो गयी। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने रोड जाम कर सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने की माँग की।

बहरहाल जनपद सोनभद्र भले ही नक्सल प्रभावित हो मगर आंकड़े के मुताबिक यहां सबसे ज्यादा मौतें सड़क हादसों में होती हैं। अब देखने वाली बात यह है कि हादसों के इस आंकड़ों को पुलिस प्रशासन किस तरह कम कर पाती है।



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