सरकार और किसान नेताओं की पांचवें दौर की वार्ता विफल, सरकार ने फिर मांगा वक्त

कृषि कानून पर पांचवें दौर की वार्ता में कोई भी नतीजा नहीं निकल पाया। हालांकि किसान यूनियन के राकेश टिकैत का कहना है कि पहले से घोषित 8 दिसंबर को भारत बंद होगा। विज्ञान भवन में हुई बैठक में किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधि शामिल हुए। आज की बैठक में सरकार ने किसानों से और वक्त मांगा । अब 9 दिसंबर को सुबह 11 बजे फिर सरकार और किसान नेताओं की बातचीत होगी ।

बैठक के बाद किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा है कि वे हमें 9 दिसंबर को एक प्रस्ताव भेजेंगे। हम (किसान) आपस में इस पर चर्चा करेंगे, जिसके बाद उसी दिन उनके साथ बैठक होगी । वहीं, किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि हम कानून रद्द करा कर ही मानेंगे । इससे कम पर हम मानने वाले नहीं हैं।

किसान सरकार से अब हां या ना में जवाब चाह रहे हैं। आज दिल्ली के विज्ञान भवन में पांचवें दौर की वार्ता के दौरान किसान नेता शांत बैठ गए थे । और मंत्री आपस में बात करने के लिए बाहर चले गए थे । किसान नेता एक पन्ने पर हां या ना यानी यस या नो लिखकर बैठे थे । किसान संगठन के नेता बैठक में मंत्रियों के सामने यस या नो प्ले कार्ड लेकर बैठ गए ।

किसान संगठनों ने सरकार से कहा कि हमारे पास एक साल की सामग्री है । सरकार को तय करना है वो क्या चाहती है । किसान नेताओं ने सरकार से कहा कि आप बता दीजिए कि आप हमारी मांग पूरी करेंगे या नहीं।

वार्ता के दौरान किसान नेता सरकार से बेहद नाराज नजर आए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार हमारी मांगों पर फैसला ले, नहीं तो हम बैठक से जा रहे हैं. किसानों संगठनों के नेताओं ने बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री के बयान का हवाला दिया । किसान नेताओं ने कहा कि नए कृषि कानूनों पर कनाडा के प्रधानमंत्री और वहां की संसद चर्चा कर रही है, लेकिन हमारी सरकार हमारी बात को नहीं सुन रही ।

किसान संगठनों ने बैठक में कहा कि हम सरकार से चर्चा नहीं, ठोस जवाब चाहते हैं वो भी लिखित में । अब तक बहुत चर्चा हो चुकी है। बैठक में सरकार ने कहा कि कानून रद्द करने के अलावा कोई और रास्ता निकाला जाए. सरकार की तरफ से संशोधन की बात रखी गई । वहीं, दूसरी तरफ किसान नेता कृषि कानून रद्द कराने पर अड़े रहे ।सरकार ने संशोधन का प्रस्ताव दिया, जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया ।



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