जिलाधिकारी ने गौशाला की व्यवस्था का लिया जायजा

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत । जिलाधिकारी पुलकित खरे की अध्यक्षता में नूरपुर वृहत गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने तथा सम्बद्ध स्वयं सहायता समूहों को गौशालाओं में गोबर से निर्मित उत्पाद सम्बन्धी प्रशिक्षण/कार्याशाला का आयोजन गौशाला परिसर में किया गया। आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिलाधिकारी द्वारा स्वयं सहायता समूहों से बातचीत करते हुये समूहों को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली योजनाओं के सम्बन्ध में जानकारी देते हुये कहा कि समूह अपने कार्यों द्वारा अधिक से अधिक सरकार की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होने कहा कि शनिवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में गोबर से प्राकृतिक उत्पाद जैसे गमले, जीवामृत, धूपबत्ती, उपले, दीपक जैसे उत्पादकों का बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान जिलाधिकारी द्वारा प्रशिक्षण दे रहे रामऔतार मौर्या, सूरज सिंह व अरविन्द मिश्रा से समूहों को मौके पर गौमूत्र व गोबर से धूपबत्ती, अगरबत्ती, जीवामृत, गमले व उपले आदि बनाने का कार्य सिखाया गया तथा समूह की महिलाओं को प्रेरित करते हुये कहा कि यदि आप गौशाला में उपरोक्त बताई गई सामग्री का इस तरह निर्माण करेगें तो सभी को अच्छी आय प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि खाली समय में आप गौशाला में आकार बताई गई विधियों से सामग्री बनाये तथा इसकी बिक्री हेतु जनपद स्तर पर विभिन्न विभागों को आवश्यकतानुसार बिक्री की जायेगी। कार्य शुरू करने हेतु उपरोक्त सामग्री निर्माण हेतु आवश्यक सामान प्रधान व सचिव के सहयोग से उपलब्ध कराई जायेगी और साथ ही साथ तैयार सामग्री को स्थानीय बाजार से लेकर बाहर बाजार में बेचने की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक सामग्री की मांग बाजार में बढ़ गई है। आप लोगों की आय में बढ़ोत्तरी हो सकेगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना के अन्तर्गत वर्मी कम्पोस्ट पिट बनाकर जैविक खाद तैयार करने हेतु सचिव को निर्देशित किया गया।
आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ साथ जिलाधिकारी द्वारा गौशाला का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। इस दौरान पशुओं हेतु उपलब्ध भूसा, हरा चारा, पीने का पानी की व्यवस्था देखी गई तथा नैपियर घास के सम्बन्ध में सचिव को निर्देशित करते हुये मनरेगा के माध्यम से तार फेसिंग कर हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी द्वारा भूसा कक्ष में भूसे की उपलब्धता का जायजा लेते हुये विगत माह में खरीदे गये भूसे व हरे चारे के बिल वाउचर की जांच की गई और साथ ही साथ गौशाला में प्रतिदिन आने वाले नये गौवंशों की ईयर टैगिंग की जांच की गई। इस दौरान बिल बाउचर के रजिस्टर को अपडेट करने हेतु निर्देशित किया गया। गौशाला परिसर में स्थित तालाब का सौन्र्दीयकरण कराकर गौवंशों हेतु उपयोग करने हेतु निर्देशित किया गया।
प्रशिक्षण में मुख्य विकास अधिकारी श्रीनिवास मिश्र, परियोजना निदेशक अनिल कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी जहानाबाद, प्रशिक्षणकर्ता रामऔतार मौर्या, सूरज सिंह व अरविन्द मिश्रा, स्वयं सहायतों समूह उपपिस्थत रहें।



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