भ्रष्टाचार के मामले में खण्ड विकास अधिकारी बरखेड़ा निलंबित

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)पीलीभीत। जिलाधिकारी द्वारा की गई संस्तुति के आधार पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध शासन ने कड़ी कार्यवाही करते हुए वर्तमान बरखेड़ा खंड विकास अधिकारी प्रद्युम नारायण द्विवेदी को निलंबित कर दिया गया है।
शासन द्वारा जारी पत्र के मुताबिक खण्ड विकास अधिकारी, विकास खण्ड बरखेडा के विरूद्ध विकास खण्ड – बिलसण्डा की तैनाती की अवधि का एक वीडियो न्यूज चैनल पर प्रसारित (वायरल) हुआ , जिसकी जाँच जनपद – स्तर पर गठित संयुक्त टीम द्वारा की गयी । संयुक्त टीम द्वारा जॉचोपरान्त पाया गया कि विकास खण्ड – बिलसण्डा में श्री द्विवेदी के आवास पर संतोष सिंह , निवासी पंडरी मरौरी , दिनांक 30 सितम्बर 2020 को उनसे मिलने आये थे और उनके आवास पर मेज की दराज में संतोष सिंह द्वारा नोटो का एक बंडल रखा गया था, जिसके सम्बन्ध में दीनानाथ पुत्र विजय पाल, निवासी – मदनमोहन कॉलोनी, बिलसण्डा जो खण्ड विकास अधिकारी बिलसण्डा के आवास पर पूर्व से ही थे, के द्वारा प्रद्युम्न नारायण द्विवेदी को मेज की दराज में संतोष सिंह द्वारा धनराशि रखे जाने के सम्बन्ध में जानकारी दी गई ।
प्रद्युम्न नारायण द्विवेदी को संतोष सिंह द्वारा उनके आवास पर आकर मेज की दराज में धनराशि रखे जाने के उपरान्त इनका दायित्व था कि सर्वप्रथम अनधिकृत रूप से आवास पर धनराशि देने के सम्बन्ध में संतोष सिंह के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर वस्तुस्थिति से तत्काल उच्चाधिकारियों को अवगत कराना चाहिए था । श्री द्विवेदी द्वारा अपने स्पष्टीकरण में स्वयं धनराशि वापस किया जाना स्वीकार किया गया है, जो सरकारी कर्मचारी / अधिकारी के आचरण को संदिग्ध प्रदर्शित करता है । इस प्रकार श्री द्विवेदी के विरूद्ध प्रथम दृष्टया उत्कोच (रिश्वत) लिये जाने का मामला बनता है । श्री द्विवेदी का उक्त कृत्य गम्भीर दुराचरण की श्रेणी में आता है तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली -1956 के नियम -3 ( 1 ) ( 2 ) का उल्लंघन है , जिसके लिए श्री द्विवेदी के विरूद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित है ।
अस्तु उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक ( अनुशासन एवं अपील ) नियमावली 1999 के नियम -4 के अन्तर्गत प्रद्युम्न नारायण द्विवेदी, खण्ड विकास अधिकारी , विकास खण्ड – बरखेडा को एतद्द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलम्बित किया जाता है ।निलम्बन की अवधि में श्री द्विवेदी को वित्तीय नियम संग्रह खण्ड -2, भाग -2 से 4 के मूल नियम -53 के प्राविधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि अर्द्ध वेतन पर देय अवकाश वेतन की राशि के बराबर देय होगी तथा उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि पर मंहगाई भत्ता, यदि ऐसे अवकाश वेतन पर देय है , भी अनुमन्य होगा किन्तु ऐसे अधिकारी को जीवन निर्वाह भत्ते के साथ कोई मंहगाई भत्ता देय नहीं होगा , जिन्हें निलम्बन से पूर्व प्राप्त वेतन के साथ मंहगाई भत्ता अथवा मंहगाई भत्ते का उपांतिक समायोजन प्राप्त नहीं था । निलम्बन के दिनांक को प्राप्त वेतन के आधार पर अन्य प्रतिकर भत्ते भी निलम्बन की अवधि में इस शर्त पर देय होंगे, जब इसका समाधान हो जाय कि उनके द्वारा उस मद में व्यय वास्तव में किया जा रहा है, जिसके लिये उक्त प्रतिकर भत्ते अनुमन्य हैं । 22/ ( 2 ) 3 उपर्युक्त प्रस्तर -2 में उल्लिखित मदों का भुगतान तभी किया जायेगा जबकि श्री द्विवेदी इस आशय का प्रमाण – पत्र प्रस्तुत करें कि वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापारवृत्ति एवं व्यवसाय में नहीं लगे हैं । निलम्बन की अवधि में प्रद्युम्न नारायण द्विवेदी कार्यालय आयुक्त, ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश लखनऊ से सम्बद्ध रहेंगे ।



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