क्रय केंद्र पर धान की रखवाली में खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी रात

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

– तेज ठिठुरन व बूंदाबांदी के बीच धान की बोरियों को भीगनें से बचाने के लिए घर से लानी पड़ी चादरें एवं कंबल

विंढमगंज । दुद्धी विकास खंड के महुली कस्बा स्थित सहकारी समिति पर किसानों को धान बेचने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।जगह के अभाव मे करीब पखवाड़े भर से बंद चल रहे धान क्रय केन्द्र पर गुरुवार को धान की बोरियों का उठान हो जाने की सूचना पर क्षेत्र के किसान अपना धान बेचने के लिए पहुंचे थे।पतरिहा गांव के किसान रघुनाथ गुप्ता, महुली के राजकुमार यादव, पोलवा गांव के महेश गुप्ता ने बताया कि गुरुवार को दोपहर में धान लेकर क्रय केन्द्र पर पहुंचा तो पहले से धान बेचने के लिए पहुंचे अन्य किसानों का धान क्रय करने में ही शाम हो गया।इन्होंने कहा कि कर्मचारी जब घर चले गए तो धान की रखवाली में उन्हें खुले आसमान के नीचे ही रात बितानी पड़ी।किसानों ने बताया कि अचानक मौसम के बदले तेवर और बूंदाबांदी के बीच उन्हें अपने धान की बोरियों को भीगनें से बचाने के लिए घर से कंबल और चादर लाकर ढकना पड़ा|किसानों ने बताया कि धान क्रय केन्द्र पर बोरियों को ढकने के लिए तिरपाल नहीं मिलने से वे ठिठुरन भरी सर्दी और टिपटिप हो रही बारिश में काफी परेशान रहे।धान क्रय केन्द्र पर अलाव की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों के साथ रात गुजारनी पड़ी।किसानों का कहना है कि धान क्रय केन्द्र पर किसानों के सुविधाओं का कोई ख्याल नहीं होने से किसान परेशान हैं। किसानों ने यहां व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं को तत्काल दूर करने की मांग की है।



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