कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में जमकर झूमे श्रोता,लगते रहे रातभर ठहाके

रमेश यादव ( संवाददाता )

क़ौमी एकता के तत्वावधान में आयोजित की गया 35 वाँ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा

– कोविड के कारण इस बार कचहरी परिसर के डॉ राजेन्द्र प्रसाद हॉल में सम्पन्न हुआ कार्यक्रम

दुद्धी।बुधवार के शाम को दुद्धी मुंसिफ कोर्ट स्थित डॉ राजेन्द्र प्रसाद भवन में कौमी एकता के तत्वावधान में 35 वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुद्धी चेयरमैन राजकुमार अग्रहरि ने माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि राजकुमार अग्रहरि ने कहा कि कवि सम्मेलन एवं मुशायरे के आयोजन के लिए कमेटी ने सार्थक पहल की है ।कोविड- 19 का पालन करते हुए यह आयोजन सम्पन्न कराया जा रहा है।हम अपने नगर में आए हुए सभी मंचासीन कवियों का स्वागत करते हैं।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री विभा शुक्ला ने मां वीणा वाली की वंदना के किया।इसके बाद कवियों ने एक से बढ़कर एक रचना और गीत सुनाकर समा बांध दिया और जमकर तालियां बटोरी ।गोरखपुर के गीतकार मनमोहन मिश्र ने “नफरत का जाम मुझसे तो ढाला न जाएगा” ये काम मेरे दिल से संभाला न जाएगा” औकात जानता हूं मैं अपने शदू का” किचड़ किसी पर मुझसे उछाला न लाना जाएगा” जैसी गीत सुनाकर बाहबाही बटोरी ।

कवि लोकनाथ अनगढ़ ने अपनी रचना बीवियों पर व्यंग्य कसते हुए “आई हो मेरी जिंदगी में तुम जुगाड़ बनके” मेरे घर में सोई रहती हो तुम पहाड़ बनके” जैसी रचना लोगों के बीच रखी जिसे साहित्य प्रेमियों ने जमकर सराहा। शायर हसन सोनभद्री ने “किसी मछली को पानी से निकालो मेरी चाहत का अंदाजा लगा लो” खिंजा में एक नजर पत्तों पर डालो मेरी हालात का अंदाजा लगा लो”जैसी गीत सुनाई।गढ़वा झारखंड से पधारे कवि राम अवध पुष्कल ने “लिखना बहुत कठिन है पानी से पानी पर पानी लिखना बहुत कठिन है” तथा कवि इमरान बनारसी ने “तेरे वाले कमान वाले हैं हम बड़ी आन बान वाले हैं जिसका सम्मान करते हैं दुनिया हम वह हिंदुस्तान वाले हैं” सुनाई ।

जबकि बनारस से पधारे कवि नागेश शांडिल्य ने “अखबारों में एक समाचार रहता है जरूर दो बच्चे की मां दो बच्चों के पिता के संग फुर्र — तथा प्राइमरी स्कूलों की दशा पर व्यंग्य रचना पढ़कर जमकर बाहबाही लूटी। कवि बादशाह प्रेमी ने “सुना है इश्क में गधे भी सूखी घास खाते हैं वह पागल लोग हैं जो प्यार में सल्फास खाते”जैसी कविता पढ़ी।

मंच की एक मात्र कवियत्री विभा शुक्ला ने “अगले जन्म में मिलने का वादा ना कीजिए मैं पूर्णिमा का चांद हूं ,आधा न कीजिए। मैं रुकमणी हूं आपकी अधिकार है, मेरा अधिकार छीन के मुर्म राधा ना कीजिए — ” जैसी गीत पढ़कर लोगों के दिलों में जगह बना गईं। सोनभद्र जिले के म्योरपुर के युवा कवि यथार्थ विष्णु दयाल ने लॉकडाउन में भी किसानों की भूमिका पर कविता पढ़ी ।उनकी पंक्ति “फक्र मुझे है भारत मां, मैं भी किसान का बेटा हूं” — जैसी रचनाएं कवियों ने प्रस्तुति किया।

इस अवसर पर कौमी एकता समिति अध्यक्ष रामलोचन तिवारी, रामपाल जौहरी, सत्यनारायण यादव, कोषाध्यक्ष मदन मोहन तिवारी, सचिव शिवशंकर गुप्ता, प्रचार प्रसार मंत्री भीम जायसवाल, रामेश्वर रॉय, धर्मेन्द्र सिंह, मनोज पांडेय, प्रभु सिंह, जगदीश्वर जायसवाल, राकेश श्रीवास्तव, विष्णु कांत तिवारी, देवेश मोहन, विष्णु अग्रहरि, प्रमोद कुमार,रमेश यादव, अविनाश कुमार,संगीता वर्मा,वन्दना कुशवाहा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।



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