उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महापर्व छठ संपन्न

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । लोक आस्था के महापर्व छठ के चौथे दिन आज सुबह जिले के अलग-अलग हिस्सों में नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर व्रतियों ने सूर्य देव को दूसरा अर्घ्‍य दिया और छठी मैया की पूजा के साथ यह पर्व संपन्न हो गया। आम से लेकर खास तक सभी ने छठ पर्व पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया।

छठ पर्व के चौथे एवं अंतिम दिन तड़के ही उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए व्रती और उनके परिजन अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ घाटों पर पहुंच गए थे। कमर तक पानी में डूबे हुए और पूजा सामग्रियों से भरे सूप हाथों में लिए व्रतियों ने भगवान भास्कर को पूरी श्रद्धा के साथ दूसरा अर्घ्‍य दिया। कई श्रद्धालु ऐसे भी थे जो कल डूबते सूरज को अर्घ्य देने के बाद से ही घाटों पर जमा थे।

सूर्य को आखिरी अर्घ्‍य देने के साथ ही व्रतियों ने व्रत का समापन किया। छठ व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण किया और इसी के साथ ही व्रत और उपवास का चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो गया।

सुबह घुटने तक पानी में खड़े होकर व्रतधारियों ने सूप, बांस की डलिया में मौसमी फल, गन्ना सहित पूजन सामग्री और गाय के दूध से भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और सुख समृद्धि की कामना की।

वहीं पूजा समाप्ति के बाद छठ घाट के समीप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने स्टॉल लगाकर सेवाभाव करते हुए व्रत धारियों और अन्य लोगों को भी चाय पिलवाया। इस दौरान गणेश पांडेय, शशांक मिश्रा, प्रिंस सिंह, अमन राज, गोलू समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

वहीं प्रशासन भी छठ घाट पर मुस्तैद रहा। इस दौरान एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, कोतवाल अंजनी कुमार राय, टीआई वागीश बिक्रम सिंह, एसआई अशोक यादव पुलिस बल समेत मौजूद रहे।

मान्यता के अनुसार कोई भी व्यक्ति पूरे श्रद्धा भाव से व्रत कर के सूर्य देव की उपासना करता है और उन्हें अर्घ्य देता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और उसके कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं। ऐसी ही भावनाओं के साथ जिले के व्रती घाट पर अपने परिवार के साथ पहुंचे और पूजा अर्चना की।
बता दें कि छठ का पर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ था। दूसरे दिन खरना पर गुड़ की खीर बनाई गई और तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। आखिरी दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है, इसी के साथ छठ पर्व संपन्न हो जाता है।



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