बाजारों में रही भीड़, महिलाओं ने की खरीदारी

घनश्याम पांडेय/विनीत शर्मा(संवाददाता)

चोपन। तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति, उनके दीर्घायु तथा सुखी-आरोग्य होने तथा ऐश्वर्य की कामना लेकर महिलाएं सूर्य उपासना के महापर्व छठ में व्रत रखती हैं। महिलाएं कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय के साथ छठ पूजा की शुरुआत करती हैं। सप्तमी तक यह व्रत चलता है और इस दौरान अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर उपासना की जाती है। बुधवार से भगवान सूर्य की उपासना का यह महापर्व शुरू हो चुका है। महिलाएं नहाय-खाय के साथ व्रत प्रारम्भ करेंगी। आज खरना होगा। इस दिन महिलाएं उपवास रखेंगी। शाम को पूजा-अर्चना के बाद पारण करेंगी।

कल महिलाएं पूरे दिन उपवास रखेंगी, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगी। शाम को नदी या जलाशय के समीप जाकर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देंगी। वहीं 21 नवम्बर की सुबह महिलाएं नदी और जलाशयों के किनारे पहुंचेंगी। जैसे ही आसमान में भगवान भास्कर प्रकट होंगे, व्रती महिलाएं उन्हें अर्घ्य देंगी और पूजा-अर्चना कर व्रत पूरा करेंगी।

बाजारों में रही भीड़, महिलाओं ने की खरीदारी

छठ व्रत रखने वाली महिलाओं ने बुधवार को बाजारों में पहुंचकर नए बांस के सूप और डाला की खरीदारी की। मान्यता है कि वंश वृद्धि और रक्षा, सूप के प्रयोग से होती है। महिलाओं ने छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाले अन्य सामान की भी खरीदारी की। इस दौरान महानगर के बाजारों में पूरे दिन भीड़ रही। जगह-जगह जाम लगता रहा जिसे खत्म कराने के लिए पुलिस कर्मियों को जूझना पड़ा।

अर्घ्य के समय जरूरी सामान

अर्घ्य के समय कुछ सामान जरूरी बताए गए हैं। नए बांस के सूप और डाला का प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि वंश वृद्धि और रक्षा, सूप के प्रयोग से होती है। गन्ने का प्रयोग किया जाता है जो आरोग्य प्रदान करता है। प्रसाद में चढ़ाया जाने वाला ठेकुआ संपन्नता को दर्शाता है। मौसमी फल जो चढ़ाए जाते हैं, वह विभिन्न लाभों के प्रतीक हैं।

व्रत की मुख्य तिथियां

18 नवम्बर : नहाय-खाय

19 नवम्बर : खरना

20 नवम्बर : डूबते सूर्य को अर्घ्य

21 नवम्बर : उगते सूर्य को अर्घ्य



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