रामलीला में धनुष यज्ञ का किया सजीव मंचन

अनिता अग्रहरी (संवाददाता)
अमड़ा गांव में रामलीला में धनुष यज्ञ का मंचन करते पात्र

धीना। रामलीला समिति अमडा़ के तत्वाधान में सोमवार की देर रात धनुष यज्ञ रामलीला का मंचन किया।रामलीला में लीला प्रेमियों की काफी भीड़ जुटी रही।धनुष यज्ञ रामलीला में प्रभु राम ने शिव धनुष तोड़कर सीता को वरमाला पहनाकर जीवन संगिनी बनाया।नरवन के अमड़ा गांव में वर्ष 1947 से अनवरत रामलीला का मंचन 74 सालों से चल रहा है।रामलीला की नींव संस्थापक कृष्ण पाठक व भगवती सिंह ने रखी थी।धनुष यज्ञ मंचन में राजा जनक ने स्वयंवर में कहा की मेरा यह प्रण है कि देव दनुज नर किन्नर यक्ष गंधर्व भूमंडल के समस्त नृपति गण जो भी धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ा देगा। उसी के साथ सीता जी का विवाह कर दूंगा। इसके बाद रावण बाणासुर में बाक युद्ध होता है। रावण बाणासुर धनुष को नहीं तोड़ सके।समस्त राजाओं ने धनुष को बारी-बारी से तोड़ने की कोशिश की गई। लेकिन धनुष को हिला नहीं सके।गुरु विश्वामित्र के आज्ञा से राम धनुष को तोडकर सीता को वरमाला पहनाते है।धनुष टूटने की आवाज सुनकर परशुराम क्रोधित होकर पूछते हैं की शिव धनुष को किसने तोड़ा है।लक्ष्मण ने कहा कि धनुष छूते ही टूट गया इसमें हमारा क्या दोष है।प्रभु राम विनय से कहते है कि आप बालक की बातों पर ध्यान मत दें इसे क्षमा करें। परशुराम राम को धनुष देकर खींचने के लिए कहते हैं कि मैं जान जाऊं कि आप लक्ष्मीपति हैं।जिससे मेरा भ्रम दूर हो जाए।राम धनुष को खींचकर परशुराम के भ्रम को दूर करते हैं।रामलीला मंचन में राम हरिओम पाठक ,लक्ष्मण ऋषभ सिंह ,साधु राजा आकाश सिंह ,दुष्ट राजा दिग्विजय सिंह ,रावण धनंजय सिंह ,सुमति शिवम् पाठक, विमती सत्यम् पाठक व्यास एवं निर्देशक की भूमिका में बलराम पाठक एवं यशवंत पाठक रहे।इस मौके पर रामलीला समिति के संजय सिंह, अनिल सिंह ,शिवाकांत सिंह ,शिवानंद सिंह आदि लोग रहे।



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