प्रभु के शरण मे जाने से हर दुःख का होता है नाश : सच्चिदानंद

अनिता अग्रहरि (संवाददाता)

धीना। मानस समिति इमीलिया के तत्वाधान में गोरखा हनुमान मंदिर पर चल रहे पांच दिवसीय कथा का समापन शुक्रवार को सम्पन्न हुआ।कथा में भक्तों ने ईश्वर की लीला पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया। कथा के अंतिम दिन प्रभु भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया।
वाराणसी से पधारे कथावाचक सच्चिदानंद ने कहा कि प्रभु श्रीराम प्रेम के साक्षात अवतार के साथ साथ आज्ञाकारी पुत्र भी थे। पिता की आज्ञा पर राज पाठ का मोह छोड़ बना गमन के लिए प्रस्थान किए। प्रभु श्री राम आज्ञाकारी पुत्र, कुशल प्रशासक के साथ-साथ प्रेम वात्सल्य की मूर्ति थे। उन्होंने धरती पर मानव का रूप लेकर दुष्टों का नाश किया।रावण को मारकर समाज को अंहकार से दूर रहने का भी सन्देश दिया था। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम पद चिन्हों पर चलकर मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। मानव जीवन में सभी को भक्ति करना चाहिए। प्रभु की भक्ति से जीवन की नैया पार लग जाती है।
कथावाचक गोविंद त्रिपाठी ने राम भक्त हनुमान की कथा सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि राम भक्त हनुमान का सुमिरन करने से रोग, ब्याध से मुक्ति मिलती है। हनुमान अपने भक्तों को बचाने के लिए काल से भी लड़ जाते है।अंत मे संगीतमय आरती के बाद कथा का समापन कर दिया गया। कथा का रसपान करने वालों में हरीश सिंह, सतीश सिंह, बिनोद तिवारी,सूर्यभान सिंह, कपिलदेव उपाध्याय, सियाराम यादव, पप्पू सिंह आदि रहे।



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