मझरा पूरब में बाघ की घेरा बंदी के लिए हाथी तैनात

कुलदीप कुमार चौरसिया (संवाददाता)

निघासन खीरी। मझरा पूरब में एक माह के भीतर चार ग्रामीणों और एक सांड़ सहित कई बेसहारा पशुओं को निवाला बनाने वाले हिंसक बाघ की घेरा बंदी की मुहिम तेज कर दी गई है। कर्तनिया से दो मादा हाथी काबिंग के लिए लगाए गए हैं। और स्पेशल टाइगर प्रोटोक्शन फोर्स की तैनाती के साथ ही डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व डब्ल्यू टीआई के विशेषज्ञ बाघ के मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं। बफर जोन के उपनिदेशक डॉ0 अनिल कुमार पटेल ने वन कर्मियों को निर्देश दिया है कि वह काबिंग के मामले में कोताही ना बरतें। बाघ की लोकेशन लेने के लिए शनिवार को कर्तनिया वन्य जीव विहार से दो मादा हाथी चंपाकली व जयमाला ने जंगल किनारे दिनभर भ्रमण किया। हाथियों पर सवार वनरक्षक जगमोहन मिश्रा व वन दरोगा हरीलाल के साथ ही एसटी पी एफ के जवानों ने जंगल इलाके में बाघ की लोकेशन के लिए काबिंग किया। वन अधिकारियों के मुताबिक दोनों हाथी काबिंग के मामले में काफी योग्य हैं। जिन्हें महावत मोहर्रम अली व विनोद लेकर आए हैं। शनिवार को काबिंग के दौरान वन कर्मियों को जंगल तराई के खेतों में बाघ के कई पग चिन्ह देखने को मिले हैं। बेलरायां रेंजर विमलेश कुमार ने बताया कि कई घटनाओं को अंजाम देने के बाद बाघ हिंसक हो गया है। इसलिए ग्रामीणों को सतर्क करते हुए जंगल जाने पर रोक लगा दी गई है साथ ही खेतों पर काम करते समय शोर मचाते रहने के लिए कहा गया है इससे बाघ के हमले से बचा जा सकता है।



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