शिक्षिकाओं ने की सुहाग की मेंहदी के साथ पुरानी पेंशन बहाली की माँग

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले में करवाचौथ का पर्व इस वर्ष महिला शिक्षिकाओं ने अलग अंदाज में मनाया। उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सरकार के विरोध का अभिनव अंदाज चुना। महिला कर्मचारियों ने करवाचौथ की मेहंदी पुरानी पेंशन बहाली के नाम रचाई। उनका कहना है कि सरकार एक ओर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे कार्यक्रमों से महिला सशक्तीकरण की बात कह रही है। वहीं दूसरी ओर पुरानी पेंशन बंद कर महिला कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में धकेलने का काम कर रही है।

जिले सहित प्रदेश में कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलित हैं। महिला कर्मचारियों ने इस वर्ष करवाचौथ के पर्व को अलग की अंदाज में मनाया। महिला शिक्षिकाओं ने करवाचौथ पर्व पर पुरानी पेंशन बहाली के नाम की मेहंदी रचाकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया।

इस दौरान महिला शिक्षिकाओं ने कहा कि “सभी कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं। कई राज्यों में पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जा रहा है लेकिन प्रदेश सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही। जिससे कर्मचारियों को भविष्य में आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में सिर्फ महिलाएं ही रोजगार कर रही हैं, उन परिवारों के सामने परिवार की महिला सदस्य के सेवानिवृत्त होने के बाद आर्थिक संकट गहरा जाएगा। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करना महिलाओं के लिए मुश्किल हो जाएगा। कहा कि सरकारी कर्मचारी लंबी सेवा के सेवानिवृत्त होने पर खाली हाथ घर जाने से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। नई पेंशन योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को भी आर्थिक सहायता का लाभ नहीं मिल रहा है। कर्मचारी के साथ सेवा के दौरान अनहोनी होने पर परिवार पर आर्थक संकट मंडराने का खतरा बना रहता है। आर्थिक असुरक्षा की भावना में काम कर रहे शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के मनोबल पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। आंदोलनरत महिला कर्मचारियों और शिक्षिकाओं ने बताया कि पुरानी पेंशन योजना बहाल होने तक आंदोलन को जारी रखा जाएगा।”

मेहंदी रचाने वालों में अंजू सिंह, ज्योति सिंह, कल्पना, सारिका श्रीवास्तव, कलावती, आकांक्षा सिंह, अनुपमा कुमारी, सुष्मिता, नीलम व सुभद्रा पांडेय सहित बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी शामिल रही।



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