बालू के कमी से कनहर विस्थापित नही कर पा रहे भवन निर्माण

राजा( संवाददाता)

-कनहर सिचाई परियोजना पुरा होने के कगार पर
-शासन- प्रशासन के उदासीन रवैया से जनता खफा
-पुनर्वास मे आवास के लिये भी नही मिल पा रहा बालू


अमवार। कनहर सिचाई परियोजना अमवार मे कनहर और पांगन नदी के संगम पर हो रहे तेजी से बांध निर्माण कार्य से आश लगाया जा सकता है कि कुछ ही वर्षों मे कनहर बांध का निर्माण कार्य पुर्ण हो जायेगा। उसके बाद कनहर व पांगन नदी मे कई मीटर बालू की मोटी परत हमेशा के लिए डुब जायेगा। स्थानीय ग्रामीणों बुद्धिजीवीयों ने बताया कि कनहर और पांगन नदी के डूब क्षेत्र मे इतनी बालू – बोल्डर सहीत अन्य प्राकृतिक संपदा है जिसे निकालने मे सरकार को कई वर्ष लग जायेगे। और केवल बालू इतना अधिक है की शायद इस कनहर सिचाई परियोजना के तरह बालू के राजस्व से अन्य दो- तीन बड़ी परियोजनाओं का निर्माण हो जायेगा। ग्रामीण गम्भीरा प्रसाद, रामस्वार्थ, संतोष,संजय ने कहा की जिस परियोजना मे बालू – बोल्डर की भरमार है वहा उसी परियोजना के निर्माण के लिये कही और से बालू लाकर कनहर सिचाई परियोजना के लागत को बढ़ाया जा रहा है और सरकार के पैसों का बन्दर बांट किया जा रहा है, विस्थापितों ने बताया कि उपजिलाधिकारी से लिखित प्रार्थना पत्र दे विस्थापित कालोनी के लिए पागन नदी से बालू उठाने का मांग किया गया था लेकिन अभी तक कोई परमिशन नही मिला।

जी हां आपको बताते चले की कनहर सिचाई परियोजना के मिट्टी बांध पर हो रहे पिचींग कार्य के लिए लाखों घन मीटर बालू कोरगी,नगवा, मध्यप्रदेश के बालू साईट से खरीद कर लगाया जा रहा है जबकि बांध के कुछ ही मीटर के दुरी पर अथाह बालू का भंडार है यहाँ तक की कनहर डूब क्षेत्र के विस्थापितों को अपना मकान बनाने के लिये दो- चार ट्रैक्टर बालू – बोल्डर भी नही लिया जा सकता। स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग करते हुये कहा है कि डुब क्षेत्र के बालू – बोल्डर को बेच कर जो राजस्व मिलता है उससे कनहर डूब क्षेत्र के गाँव जो अमवार मे पुनर्वास हो रहे है उनके विकास कार्य मे खर्च किया जाये।



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