छठ पूजा को लेकर बाजारों में सजने लगी सूप एवं दउरी की दुकानें

रमेश यादव ( संवाददाता )

– बॉस की बनी वस्तुओं का उपयोग माना जाता है शुभ

– 18 नवम्बर से शुरू हो रही छठ पूजा 21 नवम्बर को उदयाचल सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा पारन

– 20 नवम्बर को है छठ पूजा का पर्व

दुद्धी। बिहार और पूर्वी उत्‍तर प्रदेश का सबसे प्रमुख त्‍योहार छठ पूजा के लिए अभी भले ही एक पखवाड़े से भी अधिक का समय है फिर भी छठ पूजा की तैयारी शुरू हो गई हैं ।बाजारों में भी छठ पूजा से जुड़े सूप, दउरी और ढकनी आदि की दुकानें सजने लगी है।दुद्धी कस्बे में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में भी रविवार को सूप और दउरी की दुकानें सजी हुई थी। सूप और दउरी से जुड़े कारोबारियों ने बताया कि छठ पूजा सूर्य उपासना का बड़ा पर्व है इसमें शुद्ध रूप से बने वस्तुओं की मांग अधिक रहती हैं।इसलिए हमलोग सूप और दउरी व बेना बनाने में इसकी खास ख्याल रखते हैं। छठ पूजा में प्रयुक्त होने वाले बॉस से बने वस्तुओं की मूल्यों पर गौर करें तो सूप की दाम 110 से 120 रुपये तथा दउरी सामान्य साइज की 150 से 200 तथा बॉस की टोकरी 100 से 150 रुपये तक जबकि बेना ( बॉस के पंखे ) 20 से 30 रुपये तक बिक रहे थे। इस बार छठ पूजा 20 नवंबर को पड़ रहा है. ऐसे में छठ पूजा का पर्व 18 नवंबर से शुरू हो जाएगा. क्योंकि यह त्योहार 4 दिनों का होता है. छठ पूजा को लेकर लोगों के बीच में अभी से चर्चा शुरू हो गई है. छठी माई की पूजा का महापर्व छठ दीपावली के 6 दिन बाद मनाया जाता है. छठ पूजा में सूर्य देवता की पूजा का विशेष महत्‍व होता है. मान्यता है कि छठ माता सूर्य देवता की बहन हैं. सूर्य देव की उपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और मन की सभी मुरादें पूरी करती हैं. छठ की शुरुआत नहाय खाय से होती है और 4 दिन तक चलने वाले इस त्‍योहार का समापन उषा अर्घ्‍य के साथ होती है.

नहाय खाय के साथ शुरू होती है छठ पूजा –

छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्‍ल पक्ष की षष्‍ठी से शुरू हो जाती है. इस व्रत को छठ पूजा, सूर्य षष्‍ठी पूजा और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है. इसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है, जो कि इस बार 18 नवंबर को है. इस दिन घर में जो भी छठ का व्रत करने का संकल्‍प लेता है वह, स्‍नान करके साफ और नए वस्‍त्र धारण करता है. फिर व्रती शाकाहारी भोजन लेते हैं. आम तौर पर इस दिन कद्दू की सब्‍जी बनाई जाती है.

दूसरा दिन खरना –

नहाय खाय के अगले दिन खरना होता है. इस दिन से सभी लोग उपवास करना शुरू करते हैं. इस बार खरना 19 नवंबर को है. इस दिन छठी माई के प्रसाद के लिए चावल, दूध के पकवान, ठेकुआ (घी, आटे से बना प्रसाद) बनाया जाता है. साथ ही फल, सब्जियों से पूजा की जाती है. इस दिन गुड़ की खीर भी बनाई जाती है.

तीसरा दिन सांध्य अर्घ्य –

हिंदू धर्म में यह पहला ऐसा त्‍योहार है जिसमें डूबते सूर्य की पूजा की जाती है. छठ के तीसरे दिन शाम यानी सांझ के अर्घ्‍य वाले दिन शाम के पूजन की तैयारियां की जाती हैं. इस बार शाम का अर्घ्‍य 20 नवंबर को है. इस दिन नदी, तालाब में खड़े होकर ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है.फिर पूजा बेदी पर बैठकर रात बिताई जाती हैं और सुबह की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं.

चौथे दिन सूर्योदय अर्घ्य एवं पारन –

चौथे दिन सुबह के अर्घ्‍य के साथ छठ का समापन हो जाता है. सप्‍तमी तिथि 21 नवम्बर को सुबह सूर्योदय के समय भी सूर्यास्त वाली उपासना की प्रक्रिया को दोहराया जाता है. विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा जाता है और इस तरह छठ पूजा संपन्न होती है।



अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
Back to top button
error: Content is protected !!