राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सरदार वल्लभ भाई पटेल की मनाई गई जयंती

कृपाशंकर पांडे (संवाददाता)

ओबरा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा में सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती मनाई गई जिसमें माल्यार्पण का कार्यक्रम किया गया प्राचार्य प्रमोद कुमार ने कहा कि हम सभी सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की 145 वी जयंती मनाने के लिए उपस्थित हुए हैं सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की महत्वपूर्ण सेवा को और उनके स्मारकीय योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता सरदार पटेल को बेहतर प्रयोजनों का निर्णय करने के लिए सरदार की उपाधि दी गई थी।
भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी का जन्म 31अक्टूबर1875 मैं गुजरात के नाडियाद गांव में हुआ था वह किसान परिवार में जन्म लिए थे उनके माता-पिता का नाम झावेरी भाई पटेल एवं लाडबा देवी था। वे अपने भाई बहन में सबसे छोटे पुत्र थे।
सरदार पटेल ने छोटी सी उम्र में ही अपने दृढ़ निश्चय को प्रदर्शित करना शुरू कर दिया था उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के कारण देश की निराशाजनक की स्थिति से निडर होकर विनम्र स्वभाव को धारण कर सरदार पटेल ने इंग्लैंड में बैरिस्टर की पढ़ाई शुरू की और बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की। भारत आने के बाद भारत की स्थिति ठीक ना देखकर वह गांधीजी की विचारों से प्रभावित होकर अपने साहस व तेज के साथ राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में सहभागिता करने लगे। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक विख्यात हो गए।

मौके पर मौजूद पटेल स्मृति केंद्र के संरक्षक धनराज पटेल एवं अध्यक्ष जे.सी. वीमल जी ने कहा कि भारत जब आजाद हुआ तो उस समय भारत में 562 रियासतें थी इन राज्यों का विस्तार और शक्ति भिन्न-भिन्न थी इन रियासतों का एकीकरण करने की जिम्मेदारी सरदार वल्लभ भाई पटेल को सौंपी गई और सरदार बल्लभ भाई पटेल ने भारतीय गणराज्य का निर्माण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी उस समय उन्हें “भारत के एकजुटता के सूत्रधार” की उपाधि से भी सम्मानित किया गया।
सरदार बल्लभ भाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में भारत के अशांत समय में देश का मार्गदर्शन किया।
सन 1918 खेड़ा सूखे के कारण लगान में भारी छूट की मांग कीए और इस आंदोलन को “खेड़ा संघर्ष” का नाम दिया गया।
मौके पर मौजूद आचार्य राधाकांत पांडे ने कहा कि सन 1828 में सरदार पटेल ने बारडोली सत्याग्रह किया जिसमें किसानों से लिए जाने वाले 22% लगान को गलत ठहराते हुए इसे घटाकर 6.0 3% कर दिया है तब उन्हें “बारडोली का सरदार’ कह गया इसके बाद उनके नाम के आगे “सरदार” शब्द जुड़ गया।
वर्ष 2014 में सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा इस वर्ष ही “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग” (यूजीसी) ने सरदार वलभ भाई पटेल की जयंती मनाने के लिए देश के सभी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों से तय है कि सरदार पटेल द्वारा प्रदर्शित मार्ग के परिणाम स्वरुप देश के युवा राष्ट्रीय गौरव और एकता की समा भावना को आत्मीयता से अपनाएं।
सरदार बल्लभ भाई पटेल की याद में गुजरात में 182 मीटर ऊंची एवं 597 फीट ऊंची प्रतिमा बनाई गई है जिसका नाम statue of unity रखा गया है क्योंकि सरदार पटेल एकता की प्रतीक थे।
सरदार बल्लभ भाई पटेल की मृत्यु 15 दिसंबर 1950 को बांबे में 75 वर्ष की आयु में हुई। मौके पर मौजूद रहे अध्यापक केके सिंह, अमूल्य सिंह ,महेश पांडे ,छात्रसंघ महामंत्री हरज्योत सिंह मोंगा, छात्र नेता शैलेश कुमार, छात्र नेता शुभम पटेल, पटेल स्मृति केंद्र के सचिव अजय सिंह आदि मौजूद रहे।



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