धर्म बदलने वाले आदिवासियों को न दें आरक्षण का लाभ : जनजाति सुरक्षा मंच

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जनजाति सुरक्षा मंच ने राष्ट्रपति से मांग की है कि जिन आदिवासियों ने धर्म परिवर्तन कर लिया है, उन्‍हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। मंच की ओर से कहा गया कि जनजातीय समुदाय के कुछ लोग धर्म बदलने के बाद भी जनजातीय प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जबकि जनजातीय समुदाय के वंचितों को आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। वैसे लोग आरक्षित पदों पर सरकारी नौकरियां कर रहे हैं। स्‍व0 कार्तिक उरांव ने भी इसका विरोध किया था।

आज जनजातीय सुरक्षा मंच के संयोजक राम विचार सिंह टेकाम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज जिलाधिकारी से मुलाकात कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंप धर्म बदलने वाले आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं देने की माँग की।

इस दौरान राम विचार सिंह टेकाम ने कहा कि “जिन जनजातीय बच्‍चों के माता-पिता जनजाति धार्मिक आस्‍था और परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं, उन बच्‍चों का जाति प्रमाण पत्र बनना चाहिए जबकि धर्मांतरित आदिवासियों को आरक्षण के लाभ से वंचित किया जाए। तमाम गैर धर्म और समुदाय द्वारा आये दिन अशिक्षित आदिवासियों को बहला फुसलाकर धर्मांतरण कराया जा रहा है।
ऐसे में जनजातीय सुरक्षा मंच महामहिम से माँग करता है कि पाँच दशकों से लंबित इस समस्या के समाधान हेतु प्राथमिकता के आधार पर अनुसूचित जनजातियों के साथ हो रहे इस अन्याय को हमेशा के लिए समाप्त कर धर्मांतरित लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने हेतु शीघ्र ही आवश्यक संशोधन करें ताकि वास्तविक जनजाति के जीवन में 73 वर्षों से छाया अंधेरा हटाया जा सके।”

इस दौरान आनन्द जी, रामवृक्ष, सीताराम उरांव, रामनारायण, मान सिंह, रामनारायण, रविन्द्र, प्रवीण समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।



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