गोलमाल : सोनभद्र का एक अजूबा विभाग जहां काम के पहले होती है MB व भुगतान

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

● जीरो टॉलरेंस की सरकार में भी भ्रष्टाचारी बेखौफ

● आज तक नहीं हो सकी किसी दोषी पर कोई कार्यवाही

● पहले मामला बड़ा था, मगर कुर्सी मिलते ही हो गया छोटा

सोनभद्र । जिला पंचायत में टेंडर निकलने के पहले काम की MB किये जाने के मामले में भले ही वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अमरेश पटेल पिछले तीन सालों से कार्यवाही कराने को लेकर जूझ रहे हो और अब मुख्यमंत्री से गुहार लगाने की बात कह रहे हो मगर सवाल ये उठता है कि पिछले तीन सालों में जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा इस गंभीर प्रकरण पर स्थानीय तौर पर दोषियों के खिलाफ कितने पत्र लिखे गए और क्या कार्यवाही की गई?

बड़ा सवाल ये है कि यह पहली बार देखने को मिला है कि काम का टेंडर निकलने से पहले ही MB बुक भी जारी कर दी गयी और उस काम का MB कर भुगतान भी कर दिया गया। यानी इस पूरे प्रकरण पर पूरे विभाग की संलिप्तता जाहिर होती है। इस मामले में जिलाधिकारी ने जांच के आधार पर तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी तथा तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ कार्यवाही के लिए शासन स्तर पर पत्र भेज दिया है, जो अभी तक लंबित है । जिसके लिए वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मुख्यमंत्री को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं।

मगर सवाल यह उठता है कि इस पूरे भ्रष्टाचार में स्थानीय तौर पर MB बुक जारी करने वाले लिपिक व जेई से लेकर एकाउंटेंट तक की भूमिका शुरू से ही संदेह के घेरे में होने के बावजूद अब तक इनके खिलाफ कोई कार्यवाही क्यूँ नहीं कि गयी?

वर्तमान अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने की खबर के बाद अब यह चर्चा भी शुरू हो गयी है कि जीरो टॉलरेंस की सरकार में अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अमरेश पटेल ने अब तक उपरोक्त संदिग्ध कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही क्यूँ नहीं करायी।

चर्चा यह है कि अध्यक्ष की कुर्सी मिलने से पहले अमरेश पटेल भले ही इस मामले को बड़ा मुद्दा बनाकर पेश किए हों लेकिन कुर्सी मिलने के बाद उनके लिए यहीं मुद्दा सामान्य हो गया।

बहरहाल लोगों को आज तक यह समझ में नहीं आया कि आखिर बगैर टेंडर के कौन से काम की MB की गई और उस MB बुक पर किस काम का अनुबंध नम्बर तथा ठेकेदार का नाम डाला गया?

कुल मिलाकर जिला पंचायत में गोलमाल की कहानी कोई नई नहीं है। मगर टेंडर के पहले काम दिखाकर MB करना और उसका भुगतान निकाल लेना, यह अपने आप में एक अजूबा है, जो शायद सोनभद्र जैसे जनपद में ही संभव हो सकता है।



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