आज भी विस्थापन का दंश झेल रहे विस्थापित

मुकेश (संवाददाता)

-मेडिकल अनफिट करार देकर विस्थापितों का छीना जा रहा है रोजगार


बीजपुर। जिले से करीब 100 किलोमीटर दूर दुरूह क्षेत्र बीजपुर में जब आज की महारत्न कंपनी एनटीपीसी का आगमन हुआ था, तब यहां के ग्रामीण लोगों में एक खुशी की आस जगी थी कि पूरे देश को अपनी रोशनी से जगमग करने वाली कंपनी उनके जीवन में भी रोशनी की एक किरण जरूर जगाएगी…… पर ऐसा हुआ नहीं । एनटीपीसी प्रबंधन ने उस समय ग्रामीणों को सब्जबाग दिखाते हुए उनकी जमीन हासिल कर ली और उनकी जमीनों पर अपने प्रोजेक्ट बैठा दिए पर उन विस्थापित ग्रामीणों पर कोई ध्यान नहीं दिया जिनकी जमीनें ली गई ।
आज मूलभूत सुविधाएं सड़क, पानी, बिजली की बात तो दूर पेट भरने व अपने परिवार का जीविकोपार्जन करने के लिए विस्थापितों को दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही है इसकी एक बानगी गुरुवार की सुबह एनटीपीसी रिहंद परियोजना के प्रबंधन गेट पर देखने को मिल ही गई ।


गुरुवार की सुबह एनटीपीसी रिहंद परियोजना के प्रबंधन गेट पर विस्थापित राम शुभग पाल निवासी शांतिनगर बीजपुर, का पूरा परिवार महिलाओं समेत धरने पर बैठ गया । विस्थापित राम शुभग पाल का कहना है कि वे परियोजना द्वारा विस्थापित हैं फिर भी उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है उनका आरोप है कि 3 साल पूर्व उन्हें परियोजना द्वारा 60 वर्ष के बाद ओवरऐज दिखाकर उनका रोजगार छीन लिया गया था इसके बाद वे परियोजना प्रबंधन से लगातार तीन वर्षों से अपनी बहू को रोजगार पर रखने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं पर प्रबंधन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है, प्रबंधन द्वारा उनकी बहू को कभी मेडिकल अनफिट कहकर टरका दिया जाता है तो कभी बाद में आने की बात कहकर उनकी बात को अनसुना कर दिया जाता है ।
इस वजह से थक हार कर गुरुवार की सुबह वे सपरिवार धरने पर बैठ गए ।
प्रबंधन गेट पर धरने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन सहित एनटीपीसी प्रबंधन तत्काल हरकत में आ गईं ।
मामले की सूचना पर मौके पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक बीजपुर श्याम बहादुर यादव ने सूझबूझ का परिचय देते हुए विस्थापित परिवार को समझा-बुझाकर धरने से उठाया ।
उधर इस बाबत एनटीपीसी सीएसआर के प्रबंधक अरविंद शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी विस्थापन नीति के तहत काम कर रहे हैं ।
बहरहाल विस्थापन नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की क्या गाइडलाइन है व एनटीपीसी प्रबंधन उसका कितना पालन कर रही है यह जांच का विषय है ।



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