मिशन शक्ति : श्रम प्रवर्तन अधिकारी कार्यालय में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं कल्याणार्थ गोष्ठी सम्पन्न

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । मिशन शक्ति अभियान के तहत आज श्रम प्रवर्तन अधिकारी कार्यालय में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं कल्याणार्थ एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता अपर श्रमायुक्त मिर्जापुर क्षेत्र पिपरी-सोनभद्र सरजू राम शर्मा ने किया। संगोष्ठी का संचालन मोहम्मद नौशाद, टेक्निकल रिसोर्स पर्सन, नया सवेरा, यूनीसेफ के द्वारा किया गया तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में गायत्री देवी अध्यक्ष गायत्री सेवा ट्रस्ट मौजूद रही।

कार्यक्रम में उपस्थित महिला श्रमिकों/महिला कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए महिला सशक्तीकरण, स्वालम्बन, सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा करते हुए निम्नलिखित बिन्दुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

1. समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के अंतर्गत पुरूष कर्मचारियों के समान पद एवं प्रकृति का कार्य करने वाली महिला कर्मचारियों को पुरूष कर्मचारियों से कम पारिश्रमिक नहीं दिया जायेगा तथा महिलाओं के नियोजन एवं तत्सम्बन्धी अन्य मामलों में लैंगिक आधार पर विभेद नहीं किया जायेगा। उक्त विधिक प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले नियोजक को एक माह का कारावास अथवा रू दस हजार का जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है। यदि किसी महिला कर्मचारी को समान पद एवं प्रकृति का कार्य करने वाले पुरुष कर्मचारी की अपेक्षा कम पारिश्रमिक दिये जाने की शिकायत सहायक श्रमायुक्त के समक्ष प्रस्तुत की जाती है तो उनके द्वारा सुनवाई करके बकाया अंतर वेतन की धनराशि की वसूली कराकर पीड़ित महिला कर्मचारी को दिलायी जा सकती है।

2. महिलाओं का कार्यस्थल पर उत्पीड़न (निवारण , निषेध एवं निदान) अधिनियम 2013 के अनुसार कार्यस्थल पर किसी भी महिला का लैंगिक उत्पीड़न नहीं होगा जिसके निवारणार्थ प्रत्येक कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समिति का गठन होगा जिसकी अध्यक्ष वरिष्ठ महिला अधिकारी होगी। महिला उत्पीड़न की शिकायत प्रस्तुत होने पर समिति के द्वारा संराधन कार्यवाही की जाती है। संराधन कार्यवाही में मुद्रा आधारित कोई समझौता नहीं किया जायेगा । यदि संराधन कार्यवाही के दौरान समझौता हो जाता है तो आगे जांच कार्यवाही नहीं होगी और समझौते की प्रति जिला अधिकारी/नियोजक को प्रेषित कर दी जायेगी। यदि समझौता नहीं होता है तो समिति द्वारा जांच की जायेगी और साथ ही अनुसंशा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 509 अथवा अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराये जाने के लिए पुलिस को अग्रसारित कर दी जायेगी। समिति की जांच रिपोर्ट जिला अधिकारी/नियोजक को सौपी जायेगी जिसमें पीड़ित महिला को उत्तरदाता से क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का आदेश दिया जा सकता है और क्षतिपूर्ति की वसूली भू-राजस्व के रूप में कराई जा सकती है। इसी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 के अंतर्गत प्रतिष्ठानों के स्थायी आदेश में संशोधन करके आंतरिक शिकायत समिति के गठन को अनिवार्य कर दिया गया है।

3. मातृत्व हितलाभ अधिनियम 1961 के अनुसार महिला कर्मचारी को प्रसव होने पर 2 बच्चों तक 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश, दो बच्चों से ऊपर के प्रसवों की स्थिति में 12 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश, तीन माह से कम उम्र के बच्चे को विधिक रूप से गोद लेने वाली मां अथवा कमीशनिंग मदर को 12 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश, ₹1000/- का चिकित्सा बोनस , 50 या उससे अधिक महिला श्रमिकों को नियोजित करने वाले प्रतिष्ठानों में पालना घर (केश) की व्यवस्था के प्रावधान किये गये हैं।

4. कर्मचारी राज्य बीमा से आवर्त महिला कर्मचारियों को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 के अंतर्गत मातृत्व हितलाभ कर्मचारी राज्य बीमा निगम से दिलाये जाने के प्रावधान किये गये हैं।

5. उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत महिला श्रमिकों को तीन माह के वेतन के बराबर की धनराशि मातृत्व हितलाभ के रूप में देय है साथ ही शिशु के पालन पोषण हेतु पुत्र के लिए ₹20000/- तथा पुत्री के लिए ₹25000/- की धनराशि भी देय है । प्रथम बालिका का जन्म होने पर ₹25000/- की एफ0डी0 और यदि वह दिव्यांग हो तो ₹50000/- की एफ0डी0 कर दी जायेगी जिसका भुगतान उस बालिका के वयस्क होने पर प्राप्त होगा ।

6. बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिक की प्रसव के दौरान मृत्यु होने को दुर्घटना मृत्यु की श्रेणी में रखा गया है जिसमें ₹5,25,000/- का हितलाभ देय है।

7. महिला कर्मचारियों को रात्रि पाली में नियोजित करने वाले नियोजकों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे महिला कर्मचारियों के घर से ड्यूटी पर आने एवं वापस घर जाने हेतु सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था करेंगे।

8. बोर्ड द्वारा संचालित मेधावी छात्र पुरस्कार योजना के अंतर्गत छात्रों की अपेक्षा छात्राओं को अधिक हितलाभ दिलाये जाने का प्रावधान किया गया है।

9. पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की पुत्रियों को हाई स्कूल/इन्टरमीडिएट उत्तीर्ण करने पर साईकिल दी जाती है।

10. पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की पुत्रियों के विवाह हेतु ₹55000/- का अनुदान, अंतर्जातीय विवाह हेतु रू 61000 तथा सामूहिक विवाह हेतु ₹65000/- + पोषाक हेतु ₹10000/- का अनुदान दिया जाता है।



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