विधायक निधि से बन रहे पुलिया की नींव में भ्रष्टाचार, जमीन भी अवैध

संजय केसरी (संवाददाता)

■ वन विभाग के अधिकारी अवैध भूमि और करने लगे टालमटोल

■ जेई ने कहा- फाइल देखकर ही दे सकेंगे सारी जानकारी

■ जेई को नहीं पता, पुलिया के प्रोजेक्ट की लागत


डाला । विधायक निधि से बन रहे पुलिया निर्माण में भारी गड़बड़ी व भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है । जनपद न्यूज live को मिली जानकारी को जानकर आप भी दंग मान जाएंगे ।
ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी के बारी क्षेत्र के चकदहिया टोले में बन रहे पुलिया निर्माण की नींव ही भ्रष्टाचार से खड़ी हो रही है । जिस स्थान पर पुलिया का निर्माण हो रहा है वहां आसपास जंगल है । ठेकेदार द्वारा पुलिया में लगने वाले पत्थर व बालू को जंगल से अवैध खनन कर निर्माण कार्य में लगाया जा रहा था ।

इसी शिकायत की जांच करने शनिवार को जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर टीम भी सन्न रह गयी । पुलिया निर्माण में जो भी पत्थर लगे थे वह जंगल से पत्थर को अवैध तरीके से खनन कर लगाया गया था ।
वन विभाग की टीम को शक होने पर जब जमीन की नापी की गई तो टीम की खुद की जमीन खिसक गई । जिस जगह पर पुलिया निर्माण हो रहा था वह भूमि भी वन भूमि की ही निकली। जिसके बाद टीम ने लेवरों के तगाड़ी, फावड़ा को जप्त करते हुए काम को रुकवा दिया ।
जनपद न्यूज live ने जब इस पूरे प्रकरण को लेकर रेंजर डाला को फोन किया तो रेंजर ने काम रुकवाने व लेवरों के सामानों को जप्त करने की बात बताई लेकिन वह भूमि पर हो रहे निर्माण कार्य पर कुछ भी बोलने से कतराने लगे।
यही जबाब डीएफओ ओबरा का था । उन्होंने यह तो बताया कि अवैध खनन कर मैटेरियल को पुलिया निर्माण में लगाया ज रहा था, जिसके कारण काम को रुकवा दिया है लेकिन वन विभाग की जमीन पर कैसे निर्माण चल रहा था, इस सवाल पर डीएफओ ने यह कह कर टाल दिया कि रेंज आफिस ही बता पायेगा ।
वहीं डाला रेंज के वन दरोगा ने यह स्वीकार किया कि जो पुलिया बन रहा है वह वन भूमि पर बन रहा ।
मजे की बात यह है कि विधायक निधि से बन रहे इस पुलिया निर्माण के जेई को कुछ भी नहीं पता । जेई को न तो प्रोजेक्ट की लागत का पता है और न ही अन्य कोई जानकारी । उनका कहना है कि वे आफिस खुलने पर फाइल देखकर ही बता सकेंगे ।

फिलहाल वन विभाग के अधिकारी ने वन भूमि से अवैध खनन किये जाने पर ठेकेदार व उनके सहयोगियों पर कार्यवाही की बात कर रहे हैं ।

बहरहाल वन विभाग अवैध खनन को लेकर कार्यवाही करने की प्रक्रिया तो शुरू कर दी है । लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर जमीन वन विभाग की थी तो प्रस्ताव से लेकर प्रोजेक्ट पास होने तक किसी की निगाह पहले क्यों नहीं पड़ी ।
वन विभाग जिस तेजी के साथ काम को रुकवाया और नापी कराया उतनी तेजी से कार्यवाही करने से क्यों बच रही है ।
अब देखने वाली बात यह हैं कि इस मामले में क्या कार्यवाही होता है ।



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