जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था हुई बेपटरी, वेंटिलेटर पर पहुँचा स्वास्थ्य विभाग

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

● स्वास्थ्य अधिकारी कोरोना योद्धा का तमगा लेकर कर रहे कागजी प्लानिंग

● जबकि जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था हुई बेपटरी

● जिलाधिकारी ने लपरावाह स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्यवाही का दिया था निर्देश

● लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिलाधिकारी के निर्देशों को भी कर रहे अनसुना

● मामला ड्यूटी से गायब डॉक्टर्स का हो या फिर जनपदीय ड्रग वेयर हाउस में सामानों की बर्बादी का, स्वास्थ्य अधिकारियों की चुप्पी खड़ा कर रही बड़ा सवाल

● जनपदीय ड्रग वेयर हाउस में लाखों रुपये की कीमत की मलेरिया रोधी दवा De-LARVE हो गयी एक्सपायर लेकिन जिम्मेदार कौन?

सोनभद्र । पटरी से उतर चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था अब वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे गिन रही है। विभाग की हकीकत गजब है। मरीजों को सुविधा के नाम पर प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होते हैं फिर भी सुधार के नाम पर सिफर। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी ही नहीं बल्कि धीरे-धीरे वेंटिलेटर पर पहुँच चुकी है। सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग को लेकर जिलाधिकारी भी काफी नाराज हैं।

स्वास्थ्य विभाग में जिस तरीके से अधिकारी की मनमानी चल रही है, वह अब धीरे-धीरे जगजाहिर होने लगा है। हाल ही में जिलाधिकारी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जिस तरीके से लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्यवाही के निर्देश सीएमओ को दिये गए थे वह अभी तक पूरा नहीं हो सका।

कोरोना काल में जिस तरीक़े से डॉक्टरों के आक्रोश का मामला हो या फिर डॉक्टरों के अस्पताल से गायब रहने का मामला, हर मामले में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों की चुप्पी ही उन्हें संदेह के घेरे में खड़ा कर रही है। जिले में हर प्राथमिक या फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, हर जगह समस्याओं का अंबार लगा है। कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं दवा नहीं, मरीज बेहाल हैं। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी तो कोरोना योद्धा का तमगा लेकर सिर्फ कागजों पर प्लानिंग करने में जुटे हुए हैं।

हाल ही में जिस तरीक़े से जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल के ठीक सामने व सीएमओ आवास से महज 1 किलोमीटर दूर जनपदीय ड्रग वेयर हाउस में मलेरिया की एक्सपायरी दवा व सामानों के बर्बादी की तस्वीर जनपद न्यूज Live ने दिखाया था उस पर अभी तक जिम्मेदारी तय नहीं हो सका है कि आखिर किसके वजह से यह बर्बाद हुआ। जनपद न्यूज Live ने उस समय भी सवाल खड़ा किया था कि आखिर बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? लेकिन लगता है कि स्वास्थ्य विभाग के साहेब भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही करने का अभी मूड ही नहीं बनाए हैं, तभी तो मीटिंग में जिलाधिकारी द्वारा लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्यवाही करने के मौखिक निर्देश दिए जाने के बाद भी उसे अनसुना कर दिया गया।

बहरहाल कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग को अपने साथ उन्हीं योद्धाओं को साथ लेकर चलना चाहिए जो राजा का सम्मान व सिर बरकरार रख सके। मगर सोनभद्र में जिस तरीके से ये लपरावाह योद्धा ही अपने विभाग की किरकिरी कराने में जुटे हैं, कहीं ऐसा न हो कि जिन्हें राजा अपना विश्वसनीय योद्धा समझ रहा है, वह कहीं उन्हीं का तख्ता पलट न कर दे।



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