पराली के जलाने पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्यवाही, अर्थदंड के साथ मुकदमा दर्ज

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

■ कृषक पर एफआईआर दर्ज कर लगाया गया जुर्माना,

■ सम्बन्धित क्षेत्र के लेखपाल, सचिव व किसान सहायक को किया गया निलम्बित

■ सैटेलाइट से पराली जलाने की प्राप्त होती है सूचना किसान न जलाऐं पराली

■ किसान न जलायें पराली जैविक खाद, पशु चारे के रूप में करें उपयोग

पीलीभीत । जिला प्रशासन द्वारा पराली न जलाने के सम्बन्ध में कडे़ दिशा निर्देश जारी किये गये हैं तथा नियमित किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि पराली जलाना दण्डनीय अपराध है इसके उपरान्त भी अमरिया में पराली जलाने की घटना का संज्ञान सैटेलाइट द्वारा प्राप्त होने पर जिला प्रशासन द्वारा पराली जलाने के विरूद्व आज कड़ी कार्यवाही की गई है। अमरिया के गांव चटिया भैसाहा की गाटा संख्या 437 में रक्वा 0.809 हे0 पर पराली जलने की सैटेलाइट द्वारा प्राप्त सूचना पर कड़ी कार्यवाही करते हुये बटाई कृषक अजय कुमार पुत्र बुलाकीराम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुये निर्धारित जुर्माना लगाया गया है । सम्बन्धित किसान पर 5000₹ का जुर्माना लगाते हुए हैसियत व चरित्र, व राशन निरस्त किया गया तथा ट्रैक्टर सीज किया गया है। सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने से वंचित किया गया है। हल्का लेखपाल रजनेश गुप्ता, सचिव कृष्ण मुरारी, किसान सहायक हरनंद के विरूद्व कड़ी कार्यवाही करते हुये निलम्बित किया गया है।
साथ ही साथ ग्राम प्रधान तेजराम को पंचायतीराज अधिनियम के अन्तर्गत नोटिस प्रदान की गई है। जिलाधिकारी द्वारा तहसीलदार अमरिया व थानाध्यक्ष को चेतावनी जारी की गई है तथा बीट कंस्टेबल देवव्रत को निलम्बन हेतु पुलिस अधीक्षक को संस्तुति भेजी गई है। प्रशासन आगे भी पराली जलाने के विरूद्व कड़ी कार्यवाही की जायेगी। प्रशासन किसी भी दशा में पराली जलने की घटनाऐं घटित नहीं होने देगा और आगे भी कडी़ से कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
जिलाधिकारी द्वारा समस्त लेखपालों को निर्देशित किया गया है कि सभी सुनिश्चित करें कि हल्के में पराली किसी भी दशा में न जलाई जाये और निर्देशित किया कि ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर किसानों को जागरूक किया जाये तथा पराली को नष्ट करने हेतु वेस्ट डिकम्पोजर कम्पोजर का प्रयोग कर जैविक खाद के रूप में प्रयोग करे या कस्टम हायरिंग सेन्टर से मल्चर के माध्यम से मिट्टी में मिलाने जैसे उपायों के प्रति जागरूक करें। पराली को पशुओं के चारे के रूप में काट कर उपयोग करें। किसानों द्वारा पास की गौशाला में पराली काटकर पहुंचाने पर कटाई व ढुलाई का भुगतान ग्राम पंचायत द्वारा किया जायेगा, इस सम्बन्ध में भी जागरूक किया जाये।



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