विश्व महिला ग्रामीण दिवस पर समाजसेवी निहाल सिंह ने महिलाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए बांटे फलदार वृक्ष

आलोक शर्मा (संवाददाता)

आंवला । जब से दुनिया शुरू हुई है, तभी से इंसान और क़ुदरत के बीच गहरा रिश्ता रहा है। पेड़ों से पेट भरने के लिए फल-सब्ज़ियां और अनाज मिला। तन ढकने के लिए कपड़ा मिला। घर के लिए लकड़ी मिली। इनसे जीवनदायिनी ऑक्सीज़न भी मिलती है, जिसके बिना कोई एक पल भी ज़िन्दा नहीं रह सकता। इनसे औषधियां मिलती हैं। पेड़ इंसान की ज़रूरत हैं, उसके जीवन का आधार हैं। अमूमन सभी मज़हबों में पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर दिया गया है। भारतीय समाज में आदिकाल से ही पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजा जाता है। विभिन्न वृक्षों में विभिन्न देवताओं का वास माना जाता है। पीपल, विष्णु और कृष्ण का, वट का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और कुबेर का माना जाता है, जबकि तुलसी का पौधा लक्ष्मी और विष्णु, सोम चंद्रमा का, बेल शिव का, अशोक इंद्र का, आम लक्ष्मी का, कदंब कृष्ण का, नीम शीतला और मंसा का, पलाश ब्रह्मा और गंधर्व का, गूलर विष्णू रूद्र का और तमाल कृष्ण का माना जाता है। इसके अलावा अनेक पौधे ऐसे हैं, जो पूजा-पाठ में काम आते हैं, जिनमें महुआ और सेमल आदि शामिल हैं। वराह पुराण में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है- जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, एक बड़, दस फूल वाले पौधे या बेलें, दो अनार दो नारंगी और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह नरक में नहीं जाएगा।यह हैरत और अफ़सोस की ही बात है कि जिस देश में, समाज में पेड़-पौधों को पूजने की प्रथा रही है, अब उसी देश में, उसी समाज में पेड़ कम हो रहे हैं। बदलते दौर के साथ लोगों का प्रकृति से रिश्ता टूटने लगा। बढ़ती आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए वृक्षों को काटा जा रहा है। नतीजतन जंगल ख़त्म हो रहे हैं। देश में वन क्षेत्रफल 19.2 फ़ीसद है, जो बहुत ही कम है। इससे पर्यावरण के सामने संकट खड़ा हो गया है। घटते वन क्षेत्र को राष्ट्रीय लक्ष्य 33.3 फ़ीसद के स्तर पर लाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा वृक्ष लगाने होंगे। साथ ही ख़ुशनुमा बात यह भी है कि अब जनमानस में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आ रही है। लोग अब पेड़-पौधों की अहमियत को समझने लगे हैं। महिलाएं भी इस पुनीत कार्य में बढ़ चढ़कर शिरकत कर रही हैं। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए पवित्र मेन थे अफेयर ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी निहाल सिंह ने उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के कसूमरा में क्षेत्र के किसानों को फलदार वृक्ष वितरित किए साथ ही उन्हें शपथ दिलाई कि वह और वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करेंगे इसके अलावा समाजसेवी और कंपनी सीएमडी निहाल सिंह ने लॉकडाउन में हजारों जरूरतमंद लोगों को राशन किट वितरित की इसके अलावा एक लाख से ज्यादा मास्क वितरित किए एवं सैनिटाइजर और हर्बल टी का भी उन्होंने वितरण कराया आज कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम आने वाले सभी अतिथियों को सैनिटाइज किया व सभी लोगों को मास्क वितरित किए आपको बता दें कि आज विश्व ग्रामीण महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने महिलाओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया साथ ही उन्हें फल साबुन मास्क और सैनिटाइजर वितरित किए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे आईवीआरआई बरेली के साइंटिस्ट डॉक्टर महेश चंद्र उन्होंने उपस्थित समस्त किसानों को सरकार की पर्यावरण और कृषि संबंधी योजनाओं की जानकारी दी इसके अतिरिक्त उन्होंने पर्यावरण बचाने के लिए वृक्षारोपण का महत्व बताया और उन्होंने लोगों को रक्षा रोपण करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं सीएमडी निहाल सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्मदिन पर एक-एक पौधा लगाने के साथ-साथ उसके संरक्षण का बीड़ा भी उठाना चाहिए, ताकि ग्लोबल वार्मिंग केे खतरे को कम किया जा सके। इस अवसर पर कंपनी के एमडी निहाल सिंह प्रोजेक्ट हेड राहुल शर्मा मनोज श्रोत्रिय सुभाष चंद्र अविनाश अवस्थी राजीव शर्मा अखिलेश सिंह एवं पूरी टीम मौजूद रही



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