पराली /अन्य फसल अपशिष्ट के उचित प्रबन्धन हेतु किसान बन्धु मण्डी परिसर में स्टाल से प्राप्त कर सकते हैं बायो डिकम्पोजर

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत । जनपद के किसान भाईयों को सूचित किया जाता है कि पराली के उचित प्रबन्धन हेतु बायो डिकम्पोजर की उपलब्धता हेतु मण्डी परिसर में स्टाल लगाया है। उक्त स्टाल से किसान बन्धु उचित मात्र में पराली/ अन्य फसल अवशेष के प्रबन्धन हेतु बायो डिकम्पोजर प्राप्त कर सकते हैं।
जनपद के किसान बन्धु बायो डिकम्पोजर का प्रयोग कर कृषि अवशेष का उचित प्रबन्धन कर सकते हैं जिससे भूमि की उर्वरता शक्ति में वृद्वि के साथ साथ फसल सुरक्षा भी आसानी से की जा सकती है। कृषि अवशेषों को सड़ाने का कार्य सामान्यतः विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीवों के द्वारा ही सम्भव होता है। कृषि वैज्ञानिक द्वारा शोध में कुछ फंगस/जीवाणु की प्रजातियों में कृषि अवशेष अपघटन की अधिक क्षमता का आंकलन किया गया है। सभी प्रकार के कृषि अवशेषों के साथ साथ कम्पोस्ट गढ्ढे में इनका प्रयोग करके कम समय में उच्च गुणवत्ता की कार्बनिक खाद के रूप में बदलने के लि उपलब्ध कराया जा रहा है। बायो डिकम्पोजर एक प्रकार का सूक्ष्मजीव फंफूद है जिसमें लिग्निन युक्त सेल्यूलोज को सड़ाने की प्रचुर क्षमता होती है। सभी प्रकार की वनस्पतियों की कोशिकाओं की कोशिकाभित्ति का निर्माण सामान्यतः लिग्निन सेल्यूलोज या सेल्यूलोज से ही होता है। इस प्रकार इसका प्रयोग कर सभी प्रकार के कृषि अवशेषों जैसे कूड़ा, करकट, पत्तियाॅ, धान, गेहूॅ आदि के भूसा व अवशेष जड़, तना पत्त्यिाॅ, फल, फूल, सब्जियों के छिलके, गोबर आदि में इसका प्रयोग करते हुये नमी देकर कम से कम समय में अपघटित कर कार्बनिक खाद के रूप में बदला जा सकता है।
बायो डिकम्पोजर की प्रयोग विधि- किसान बन्धु इसका खेतों में प्रयोग करने के लिए एक बडे़ ड्रम में 200 लीटर पानी भर लें, उसमें 2 से 3 किलोग्राम गुड़ घोलकर डालने के बाद बायो डिकम्पोजर की एक डिबिया (20ग्राम) को अच्छी तरह से मिला दें। इस ड्रम को ढ़क्कन से ढक कर रखें तथा दो दिन तक किसी लम्बे डण्डे से एक या दो बार चला दें। चैथे-पांचवे दिन सफेद रूई के रूप में पानी की सतह पर फंगस वृद्वि दिखाई पड़ने लगेगी जो छठे सातवे दिन में नीले, हरे व भूरे रंग का फंगस वृद्वि हो जाने पर ड्रम के पानी में अच्छी तरह से मिलाकर खेत में सिंचाई से पहले या साथ ही एक एकड़ क्षेत्र में प्रयोग कर दें।
गोबर कम्पोस्ट गढ्ढे में प्रयोग- उपरोक्त विधि द्वारा तैयार किया गया 200लीटर घोल को घूरे गढ्ढे में 15 से 30 दिन के समय अंतराल पर डालकर मिला दें। गढ्ढा भरने के 50 दिन के अन्दर उच्च कोटि की कार्बनिक खाद तैयार हो जायेगी।



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