बन्द ड्रग वेयरहाउस का ताला खोलकर माल किया जा रहा शिफ्ट, गोदाम कूड़ा घर में तब्दील

आनन्द कुमार चौबे/विनोद धर (संवाददाता)

– आखिर किसके आदेश सेड्रग वेयरहाउस का खुला ताला

– स्टाफ चार्ज लेने के लिए परेशान, स्वास्थ्य विभाग में बैठे भ्रष्टाचारी माल को ठिकाने लगाने में जुटे

– आखिर कौन बचा रहा भ्रष्टाचारियों को

– सीएमओ भी मामले पर बने हुए हैं अनजान

– ड्रग वेयरहाउस में लाखों का माल हो गया खराब

– जीरो टॉलरेंस की सरकार को अधिकारी व कर्मचारी ही लगा रहे बट्टा

– खास को बचाने में जुटे स्वास्थ्य अधिकारी

सोनभद्र । लम्बे समय से बंद जनपदीय ड्रग वेयरहाउस का अचानक ताला खुलने से स्वास्थ्य विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

जनपद न्यूज़ live लगातार जनपदीय ड्रग वेयरहाउस में ताला बंद होने की खबरों को प्रमुखता से उठाता रहा है। मामला जिलाधिकारी के सज्ञान तक पहुंची, जिसके बाद से यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि हो न हो ताला खोलकर अंदर खाने में बंद माल को कहीं न कहीं शिफ्ट किया जाएगा। उम्मीद यह भी लगाई जा रही थी कि यह काम रात के अंधेरों में अंजाम दिया जाएगा लेकिन जनपदीय ड्रग वेयरहाउस में बंद ताले की चाभी रखने वाले बड़ी चालाकी से यह काम दिन के उजाले में ही अंजाम दिया जाने लगा

जैसे ही जनपदीय ड्रग वेयरहाउस का ताला खुलने की खबर जनपद न्यूज़ live की टीम को लगी तुरन्त टीम मौके पर पहुँच गयी। टीम के मौके पर पहुँचते ही वहाँ मौजूद लोगों में हड़कम्प मच गया। मौके पर पहुँचते ही टीम ने देखा कि एक वैन और एक पिकअप खड़ी थी और कुछ लेबरों से माल पिकअप में रखा जा रहा था।

टीम ने जब इसके बारे में जानने का प्रयास किया तो वहाँ मौजूद एक स्वास्थ्यकर्मी ने खुद को स्वास्थ्य विभाग का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बताते हुए कहा कि यह सामान म्योरपुर भेजा जा रहा है।

जिसके बाद टीम ड्रग वेयरहाउस के अंदर पहुँची। अंदर का नजारा देखकर टीम भी सन्न रह गयी। अंदर स्वास्थ्य सामग्री और दवाएँ बेतरतीब बिखरे पड़े थे और कुछ लेबर उसमें छंटनी कर रहे थे। बड़ी संख्या में बंद पेटियाँ गोदाम में फेंकी पड़ी थी। देखने पर पता चला कि हजारों सर्जिकल ग्लब्स जमीन पर फेंका पड़ा था, कुछ तो हैंड ग्लब्स खुले फेंके पड़े थे।

वहीं कई दवाएं एक्सपायरी भी देखने को मिला और भारी मात्रा में बेड पर बिछाए जाने वाला चादर भी डैमेज हो चुका था, वहाँ का नजारा किसी कूड़े के ढेर से कम नहीं था।

इस पूरे मामले पर जब वहां मौजूद एक कर्मचारी से पूछा गया तो वह खुद को स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी बताते हुए अपना नाम संजय पांडेय बताया। जब टीम ने उससे इतने वर्षों बाद गोदाम खोलने का कारण पूछा गया तो वह कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उसका कहना है कि इसका जबाब सीएमओ देंगे।

बहरहाल जहां एक तरफ सरकार कोरोना काल में बचाव के लिए हैंड ग्लब्स के साथ सेनिटाइजर पर लाखों खर्च कर हर जिले में सप्लाई कराया था ताकि लोगों को इस महामारी से बचाया जा सके। मगर सोनभद्र में जिस तरह से ड्रग वेयर हाउस में सामानों को कूड़े की ढेर में फेंक दिया गया उसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?

अब देखने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग का यह कारनामा उजागर होने के बाद आखिर कब तक कार्यवाही सम्भव हो पाती है।



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