पांच दशक बाद भी 106 गांव के विस्थापितों को नहीं मिला जमीन पर मालिकाना हक- सांसद

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । 54 वर्ष बाद भी रिहन्द बॉध सिविल खण्ड, पिपरी-तुर्रा से 106 गाँवों के विस्थापितों को विभिन्न गावों में मुआवजा के रूप में मिली भूमि गवर्नमेन्ट ग्रान्ट एक्ट की भूमि को श्रेणी-1 संक्रमणीय भूमिधर भूमि दर्ज कराने के लिए अब ग्रामीणों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। मामला सांसद के दरबार पहुंचा तो सांसद भी अवाक थे। 5 दशक बाद भी स्थानीय लोगों को जमीन के अलावा सारी सरकारी सुविधा से वंचित रखा गया, यह अपने आप में एक बड़ी खबर थी। सांसद पकौड़ी लाल कोल ने ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद तत्काल जिलाधिकारी के नाम एक पत्र लिखकर पूरे समस्या से अवगत कराते हुए इसे हल करने के लिए कहा। सांसद ने पत्र के माध्यम से विस्थापितों को मुआवजे के रूप में मिली उनकी जमीनों पर उनका मालिकाना हक दिलाने के लिए जिलाधिकारी को लिखा है।

पत्र के माध्यम से सांसद पकौड़ी लाल कोल ने कहा कि “क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने मुझे बताया कि सन् 1960 के लगभग रिहन्द जलाशय बना, जिससे जिले के 106 गाँव के लोग विस्थपित हुए थे। वर्तमान सरकार ने उन विस्थापितों को दुद्धी, म्योरपुर, बभनी, अनपरा, शक्तिनगर, डाला, चोपन आदि के विभिन्न गांवों में भूमि देकर बसाया लेकिन आज 54 वर्ष बाद भी वह भूमि गवर्नमेन्ट ग्रान्ट एक्ट की भूमि खतौनी में दर्ज है, जो उक्त खतौनी से खेती की उपज अनाज को सरकार के अनाज क्रय केन्द्रों को नहीं बेच पाते, जिससे वह किसान उपजे अनाज को अढ़तियों को औने-पौने दाम पर बेचने के लिए विवश है। उक्त खतौनी पर खेती के लिये बैंक से ऋण, किसान दुर्घटना बीमा व किसी की जमानत भी नहीं करा पाते और न ही सरकार द्वारा कोई अन्य सुविधा का लाभ ले पाते हैं। अभी तक विस्थपितों को कोई मालिकाना हक नही मिल पा रहा है। इसलिए उपरोक्त रिहन्द बांध से विस्थापितों को मुआवजा के रूप में मिली गवर्नमेन्ट ग्रान्ट एक्ट भूमि को श्रेणी-1 संक्रमणीय भूमिधर भूमि दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है । ताकि मुआवजा के रूप में मिली भूमि का सम्पूर्ण लाभ विस्थापित परिवारों को मिल सके।”

बहरहाल कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सरकार विकास के नाम पर लोगों को बड़े बड़े सपने जरूर दिखता है मगर बाद में वही सपने लोगों की नींद हराम कर देती है। उम्मीद हैं कि सांसद के प्रयास से लोगों के 54 साल के सपने पूरे होने की उम्मीद है।



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