समूह बनाकर वर्षा ने महिलाओं को स्वरोजगार का दिखाया रास्ता

सुरेश श्रीवास्तव (संवाददाता)

– प्रेरणा स्रोत बनी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं, स्वरोजगार हेतु महिलाओं को जागृत करने का लिया संकल्प

खुटार (शाहजहांपुर) । खुटार में उन महिलाओं के जज्बे की लोग सराहना कर रहे हैं जो स्वयं कमर कस कर स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक तंगी से लड़कर उसे मात दे रही हैं और दूसरों के लिए भी स्वरोजगार का प्रेरणास्रोत बन रही है ऐसी ही एक महिला खुटार थाना क्षेत्र के गांव मुरादपुर की 27 वर्षीय वर्षा मिश्रा है जिन्होंने वर्ष 2016 में बालाजी स्वयं सहायता समूह नामक 10 महिलाओं का समूह बनाकर आर्थिक तंगी से लड़ने के लिए कमर कसी महिलाओ नें 50 -50 रुपए प्रति माह के हिसाब से धनराशि जमा कर सिलाई करने का स्वरोजगार अपनाया जिसमें महिलाओं ने प्राइमरी स्कूलों की ड्रेस बनाने का ठेका लेकर काम किया जिससे आर्थिक तंगी में सुधार होने लगा और परिजन भी महिलाओं के सहयोग के लिए आगे आने लगे
महिलाओं को समूह के माध्यम से वर्ष 2018 में पीएचसी खुटार में बनी कैंटीन का ठेका मिल गया जिसमें वर्षा मिश्रा किरण देवी शिवानी रीता देवी और ज्योति पांच महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से सेवा कर आर्थिक तंगी से लड़ कर उसे मात दे रही हैं साथ ही समूह की सभी महिलाएं घर पर बने सिलाई केंद्र पर सिलाई का काम भी कर रही है

*लॉकडाउन में भी नहीं रुके कदम*

महिलाओं का स्वरोजगार कोविड-19 में हुए लॉक डाउन मे भी कुछ खास प्रभावित न हो सका पीएससी पर आने वाले आपातकालीन मरीजों को खाना खिला कर महिलाओं की सेवा जारी रही वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर्स व सरकारी स्टाफ को भी महिलाएं खाना खिलाती रही

*सहयोग के साथ दान भी करती हैं महिलाएं*
जहां समूह की महिलाएं एक ओर स्वरोजगार अपनाने में सहयोग दे रही हैं वहीं स्थिति अनुसार दान देकर भी महिलाओं को गौरवान्वित कर रही हैं
समूह की अध्यक्ष वर्षा मिश्रा ने बताया की समूह की महिलाओं ने समूह की सदस्य की बेटी की अप्रैल माह में हुई शादी में ₹5000 दान किए तथा लाक डाउन के दौरान 1000 मास्क बनाकर विभिन्न स्थानों पर जा जाकर जरूरतमंदों को वितरित किए

*स्वरोजगार के माध्यम से करियर सवारने का प्रयास :जी एन एम का कोर्स करना चाहती हैं वर्षा मिश्रा*

समूह की अध्यक्ष वर्षा मिश्रा ने वार्ता के दौरान बताया कि आर्थिक तंगी के चलते उनकी पढ़ाई छूट गई थी लेकिन वह पढ़ना चाहती थी जिसके लिए उन्होंने स्वरोजगार अपनाया और वह कामयाब होने लगी घरेलू खर्च चलाकर अब शिक्षण कार्य भी शुरू कर दिया है 2018 में हाईस्कूल परीक्षा पास करने के बाद 2020 में इंटरमीडिएट की परीक्षा भी पास कर ली है इसके बाद वह जीएनएम का कोर्स करना चाहती है बाकी अन्य महिला सदस्य भी जीएनएम का कोर्स करना चाहती हैं हालांकि समूह में अभी तक इन कोर्सों पर खर्च होने वाली फीस की धनराशि एकत्रित नहीं हो पाई है फिर भी महिलाओं का प्रयास जारी है

*अभी तक नहीं मिला कोई आर्थिक सहयोग*

समूह की अध्यक्ष वर्षा मिश्रा ने बताया कि अभी तक समूह को शासन व प्रशासन की ओर से कोई विशेष आर्थिक सहयोग नहीं मिला है हालांकि फिर भी महिलाएं अपने स्वरोजगार के माध्यम से एक दूसरे का सहयोग कर रही हैं


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