परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का मनाया गया शहादत दिवस

फ़ैयाज़ खान मिस्बाही(ब्यूरो)

ग़ाज़ीपुर।ऐ शहीद-ओ-क़ौम-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसारअब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है।
ग़ाज़ीपुर की धरती का एक ऐसा योद्धा जिसने अपराजित समझे जाने वाले पाकिस्तानी टैंक को पलक झपकते ज़मीन पर बिखेर कर रख दिया।वो टैंक जो अजेय थे,जिस टैंक पर पूरे पाकिस्तानी सेना को बहुत फ़ख्र था।वीर अब्दुल हमीद ने बता दिया कि जंग हथियारों से नहीं बल्कि हौसलों से लड़ी जाती है।बस दिल मे अपने मुल्क की मोहब्बत होनी चाहिए।उस्मान और सकीना के घर ज़िला ग़ाज़ीपुर के एक छोटे से गाँव मे जन्में वीर अब्दुल हमीद ने ग़ाज़ीपुर का नाम हिंदुस्तान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित करा दिया।शुरू-शुरू में दर्जी का काम करने वाले वीर अब्दुल हमीद ने हिंदुस्तानी फौज की तरफ से लड़ते हुवे पाकिस्तान के फौज की इस तरह से बखिया उधेड़ी कि आज 55 साल गुजर जाने के बाद भी पाकिस्तान उसका रफू नही कर पाया।
आज पूरे देश में इस वीर जवान का शहादत दिवस मनाया गया।ग़ाज़ीपुर जखनिया हमारा पंप पर भी वीर अब्दुल हमीद का शहादत दिवस मनाया गया।इस पंप की खासियत ये है कि इस पर एक सेल्फी पॉइंट बना हुआ है जिसमे वीर अब्दुल हमीद का फोटो दीवारों पर उकेरा गया है।आज सैकड़ों की तादाद में लोग हमारा पंप पर बने इस रियल हीरो के फोटो के साथ सेल्फी लेने के लिये लालायित दिखे।वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल मे है।


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