ड्रेस तैयार कर समूह की महिलाएँ मजबूत कर रही स्वावलंबन की राह

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

● चूल्हे चौके तक सीमित महिलाएँ बनी परिवार की बैसाखी

● परिषदीय विद्यालयों के छात्रों के लिए ड्रेस की कर रही हैं सिलाई

● पूरे जिले में 2.49 लाख ड्रेस का है आर्डर

● 43 स्थानों पर स्थापित 170 सिलाई केंद्रों पर कुल 1025 महिलाएँ कर रही हैं सिलाई

● एक ड्रेस तैयार करने पर एक महिला को होती है 100 रुपये की आमदनी

सोनभद्र । जो महिलाएं चूल्हा-चौका तक सीमिति थी, अब महीनें में सात से दस हजार रुपये कमाकर परिवार की बैशाखी बन गई हैं। कभी खुद को बेहद कमजोर समझने वाली इन महिलाओं ने ऐसा सोनभद्र प्रशासन की मदद पर संभव कर दिखाया है। सवा हजार महिलाएं जहां स्वयं सहायता समूहों के जरिए स्कूली ड्रेस सिलाई के कार्य से जुड़ गई है।

परिषदीय स्कूलों में 2.49 लाख ड्रेस की आपूर्ति देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को काम सौंपा गया है। एक सेट ड्रेस बनाने के बाद समूह की महिलाओं को 100 रुपये की आमदनी होती है। यह समूह छात्र छात्राओं की नाप भी लेते हैं। प्रशासन ने जिले में 43 स्थानों पर कुल 170 सिलाई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, यहां पहुंच कर महिलाएँ ड्रेस बनाने का काम करती हैं।

वहीं विकास भवन में संचालित आजीविका सिलाई केंद्र में ड्रेस बनाने का काम कर रही आसमाँ बानो ने बताया कि “यहाँ समूह की 50 महिलाएँ ड्रेस सिलाई का काम कर रही हैं। यह महिलाएँ प्रतिदिन लगभग 140 से 150 कपड़े तैयार कर लेती हैं साथ ही जो कपड़ा काटने के बाद जो कतरन बच जाए रहा है उसका हमलोग मास्क तैयार कर रहे हैं जिसे छात्रों को स्कूल ड्रेस के साथ दिया जा सके और छात्र इसका उपयोग कर कोरोना जैसी महामारी से अपना बचाव कर सकेंगे।”

वहीं उपायुक्त श्रम रोजगार अरुण कुमार जौहरी ने बताया कि “समूह की महिलाओं को पूरे जिले में 249490 स्कूली ड्रेस तैयार करने का ऑर्डर मिला है। जिसके लिए पूरे जिले में 43 स्थानों पर स्थापित कुल 170 सिलाई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं और इन केंद्रों पर समूह की कुल 1025 महिलाएँ ड्रेस सिलाई का कार्य कर रही हैं और अब तक कुल 70 हजार स्कूली ड्रेस बन कर तैयार हो चुके हैं। ड्रेस सिलाई से उन्हें प्रति ड्रेस कुल 100 रुपये की आमदनी होती है, जिससे वो अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगी और अपनी आजीविका चला सकेंगी। इसी के साथ कपड़ा काटने के दौरान बचने वाले कतरन का मास्क भी तैयार कराया जा रहा है जो छात्रों को स्कूली ड्रेस के साथ दिया जाएगा, जिससे वो कोरोना काल में पहन कर अपने आप को कोरोना वायरस से सुरक्षित रख सकेंगे।”


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