बोझिल मन को शांत करने के लिए जीवन के हर मोड़ पर ध्यान रखें ये पांच टिप्स

कभी-कभी हमारे आसपास ऐसी घटनाएं घटने लगती हैं, जिससे हमारा मन निराशा से भर जाता है। मन बोझिल होने की वजह से हमारा कुछ भी नया करने का मन नहीं करता। हम किसी से बिना कुछ कहे, मन की उथल-पुथल सहते रहते हैं लेकिन लम्बे समय तक ऐसी स्थिति में रहना हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। साथ ही हम अपने लक्ष्य से दूर होते जाते हैं। आइए, जानते हैं अगर आपके साथ भी कभी ऐसा ही हो, तो आपको क्या करना चाहिए-

अच्छी किताबें पढ़ें:
एक अच्छी किताब दस अच्छे दोस्तों के बराबर होती है इसलिए अगर आपका मन किसी से बात करने का नहीं कर रहा है, तो कम से कम आप गुमसुम कहीं बैठने की बजाय कोई अच्छी किताब पढ़ें।

अपने मन की बात लिखें:
आपको अगर कोई बात परेशान कर रही है और आप किसी से कहने से झिझक रहे हैं, तो आप किसी पेपर या डायरी पर अपने मन की बात लिख सकते हैं। इससे आपको मानसिक शान्ति मिलेगी।

किसी अपने से बात करें:
आप अगर इंट्रोवर्ट हैं और आपके बहुत सारे दोस्त नहीं हैं, तो आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि हर व्यक्ति के जीवन में एक या दो लोग ऐसे होते हैं, जो उसके जीवन में अहम जगह रखते हैं। आप विश्वासपात्र व्यक्ति से अपने मन की बात कह सकते हैं।

रोजाना योग करें:
योग केवल शरीर को सेहतमंद नहीं रखता बल्कि निरंतर योग करने से सहनशीलता बढ़ने के साथ आप दिमागी तौर से भी मजबूत होते हैं। आपको छोटी-छोटी बातें परेशान नहीं करती है। आप रोजाना सुबह और रात के समय ध्यान भी लगा सकते हैं।

गीता सार याद रखें:
दुनिया में कुछ भी स्थाई नहीं है। सुख-दुःख सभी बदलते रहते हैं। इसका अर्थ यह है कि जिन परिस्थितियों ने आपको उदास किया हुआ है, वे आज नहीं तो कल बदलेगी जरूर इसलिए अपने आपको भरोसा दिलाएं कि बुरा समय बदलेगा। परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है।


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