सोनभद्र में अब ओझा-सोखा नहीं लगा सकेंगे भूतों की दुकान, प्रशासन की होगी पैनी निगाह

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

अंधविश्वास के मकड़जाल में फंस रहे आदिवासी

अशिक्षा व गरीबी के कारण दूरदराज में रहने वाले लोग आसानी से अस्पतालों में नहीं करा पाते अपना इलाज

आदिवासियों के अशिक्षा व गरीबी का फायदा उठाते हैं ओझा-सोखा

दुद्धी की पूर्व विधायक रूबी प्रसाद ने तो बढ़ते अंधविश्वास को लेकर विधानसभा में भी उठाया था मामला

एसपी बोले यदि अंधविश्वास को लेकर कोई मामला आता है तो होगी 120 (बी) के तहत कार्यवाही

डीएम बोले, अधिकारी गाँवों में जाकर ग्रामीणों को ओझाओं के बारे में करेंगे जागरूक

सोनभद्र । आज हम भले ही चांद सितारों की बातें करते हों मगर देश में आज भी ऐसे कई इलाके हैं जहां अंधविश्वास हाबी है । जहां लोग अस्पताल से ज्यादा तंत्र-मंत्र व जादू-टोना पर विश्वास करते हैं । इसी अंधविश्वास को मिटाने के लिए सोनभद्र में प्रशासन ने नया प्लान तैयार किया है । एक तरफ जिला प्रशासन अधिकारियों के साथ मीटिंग में इसे खत्म करने की चर्चा कर रहे हैं वहीं पुलिस भी गांव मब चौपाल लगाकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ओझा-सोखा की दुकान बंद हो सके और लोग इस अंधविश्वास से बाहर निकल सके।

यह तस्वीर है उस 21वीं सदी की जब हम चांद पर बसने की बात कर रहे हैं। यह तस्वीर यह बयान करती है कि कैसे आज भी भारत के कई इलाके अंधविश्वास की मकड़जाल में फंसे हैं? आज हम बात कर रहे हैं नक्सल प्रभावित जनपद सोनभद्र की। जहाँ आज भी लोग अंधविश्वास के चक्कर में इस कदर फंसे हुए हैं कि बात मारपीट व हत्या तक पहुँच जाती है। अशिक्षा व गरीबी के कारण दूरदराज में रहने वाले लोग आसानी से अपना इलाज अस्पतालों में भी नहीं करा पाते और इसी का फायदा उठाते हैं स्थानीय तौर पर ओझा-सोखा।

ये ओझा-सोखा लोगों को इस कदर बरगलाते हैं कि उनकी सारी परेशानी का हल सिर्फ उन्हीं के पास है।

कहा जाता है कि आस्था व अंधविश्वास की डोर बहुत नाजुक व बारीक होती है….इसी का फायदा आदिवासी क्षेत्रों के ओझा-सोखा उठाते हैं। दुद्धी के पूर्व विधायक रूबी प्रसाद ने तो बढ़ते अंधविश्वास को लेकर विधानसभा में मामला भी उठाया था।

हर मामले में ओझा व तांत्रिक के बढ़ते दखल अंदाजी को देखते हुए जिला प्रशासन ने ओझा और सोफा की दुकान बंद करने का बीड़ा उठा लिया है।

पुलिस अधीक्षक की माने तो पिछले 5 सालों में लगभग 25 से 26 मामले अलग-अलग थानों में भूत-प्रेत को लेकर दर्ज है। यानी यह कहा जा सकता है कि सोनभद्र में किस कदर अंधविश्वास हावी है।

पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि कांबिंग के दौरान लोगों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया है और यदि अंधविश्वास को लेकर कोई मामला आता है तो कार्यवाही की जाएगी।

वहीं जिलाधिकारी भी अब अपने अधिकारियों के साथ मीटिंग में इस मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे ताकि अधिकारी जब गांव में जाएं तो लोगों को जागरूक करने का भी काम का सके। जिलाधिकारी ने बताया कि उन्होंने अपने सभी अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है।


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