प्रसूता चढ़ी लापरवाही की भेंट, प्रसव उपरांत मौत पर परिजनों का हंगामा

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । मातृ-शिशु मृत्यु को कम करने के लिए भले ही केंद्र व प्रदेश सरकारों द्वारा लाख जतन किए जाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में वह धरातल पर नजर नहीं आते। आलम यह है कि आये दिन प्रसूताओं के साथ घटित घटनाओं से स्वास्थ्य विभाग अक्सर ही विवादों में घिरा रहता है।
ताजा मामला लोढ़ी स्थित जिला संयुक्त अस्पताल का है जहाँ एक महिला और नवजात को उसके परिजन जिला संयुक्त अस्पताल ले कर आते हैं, लेकिन डॉक्टर परीक्षण के उपरांत महिला को मृत लाया घोषित कर देते हैं और नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एनआईसीयू में भर्ती कर दिया गया।

वहीं परिजनों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तियरा में डॉक्टरों द्वारा प्रसूता के साथ लापरवाही बरतने के कारण मौत होने का आरोप लगा हंगामा शुरू कर दिया।

परिजनों के अनुसार “गुड्डी (25वर्ष) पत्नी राजू को आज सुबह 6 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुआ तो एम्बुलेंस को फोन किया गया लेकिन रास्ता ख़राब होने के कारण डॉयल 108 एम्बुलेंस कुछ पहले ही रुक गयी और गुड्डी पैदल ही एम्बुलेंस तक पहुँची। तब तक स्थिति ठीक थी और डॉयल 108 एम्बुलेंस गुड्डी को लेकर तियरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँची। डिलेवरी के बाद महिला और नवजात की स्थिति बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने आनन-फानन में महिला और नवजात को जिला संयुक्त अस्पताल के लिए रेफर कर दिया लेकिन जिला अस्पतला में डॉक्टरों में महिला को मृत लाया घोषित कर नवजात को एनआईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया।”

मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ0 पी0बी0गौतम ने बताया कि “प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तियरा से लाते समय रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया था, नवजात बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।”

बड़ा सवाल ये उठता है कि किसी भी मामले में जनपद के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच का आश्वासन देकर मामले को चलता बनाया जाता है लेकिन ऐसी घटनाएँ मात्र कागजों में ही सिमट कर रह जाती हैं और यह खेल आए दिन किसी न किसी रूप किसी गरीब के मौत के साथ खेल जाता है, कभी अस्पताल में मौजूद डॉक्टर के लापरवाही के कारण मौत होती है, तो कभी सब मौजूद होने के बाद दवा और अन्य उपयुक्त वस्तुओं की कमी कारण मौत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रदेश सरकार के लाख दावे जनता के सामने झूठे साबित होते नजर आ रहे हैं और असलियत के धरातल पर मातृ-शिशु मृत्यु को कम करने का दावा विफल साबित होता प्रतीत हो रहा है।


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