दुख हो या सुख, हमेशा भगवान को करना चाहिए याद

एक बार गुरु जी से उनके शिष्य ने पूछा कि भगवान हमें सिर्फ कठनाई में ही क्यों याद आते हैं, जबकि खुशी में हम उन्हें उस प्रकार याद नहीं करते जितना दुख में याद करते हैं। महात्मा ने शिष्यों को समझाने के लिए उन्हें एक कथा सुनाई। महात्मा ने बताया कि एक निर्माणाधीन भवन की सातवीं मंजिल से ठेकेदार ने नीचे काम करने वाले मजदूर को आवाज दी। निर्माण कार्य की तेज आवाज के कारण मजदूर सुन न सका कि उसका ठेकेदार उसे आवाज दे रहा है।

ठेकेदार ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक 1 रुपये का सिक्का नीचे फेंका, जो ठीक मजदूर के सामने जाकर गिरा। मजदूर ने सिक्का उठाया और अपनी जेब में रख लिया और फिर अपने काम मे लग गया। मजदूर का ध्यान दोबारा अपनी ओर खींचने के लिए ठेकेदार ने इस बार 5 रुपये का सिक्का नीचे फेंका लेकिन उसने फिर वही किया, इसपर ठेकेदार ने 10 रुपये का सिक्का नीचे फेंका। उस मजदूर ने फिर वही किया और सिक्के जेब मे रख कर अपने काम मे लग गया।

इस पर ठेकेदार गुस्सा गया और उसने एक छोटा सा पत्थर उठाकर मजदूर के उपर फेंका जो सीधा मजदूर के सिर पर लगा। अब मजदूर ने ऊपर देखा और ठेकेदार से बात चालू हो गयी। बिल्कुल ऐसी ही घटनाएं हमारी जिंदगी में भी घटती रहती हैं।

भगवान हमसे संपर्क करना, मिलना चाहते हैं लेकिन हम दुनियादारी के कामों में इतने व्यस्त रहते हैं कि हम भगवान को याद नहीं करते। भगवान हमें छोटी-छोटी खुशियों के रूप में उपहार देता रहता है लेकिन हम उसे याद नहीं करते और वो खुशियां और उपहार कहां से आए यह न देखते हुए, उनका उपयोग कर लेते हैं और भगवान को याद ही नहीं करते।

भगवान हमें और भी खुशियों रूपी उपहार भेजता है लेकिन उसे भी हम हमारा भाग्य समझ कर रख लेते हैं, भगवान् का धन्यवाद नहीं करते, उसे भूल जाते हैं। वहीं जब हमारे ऊपर कठनाई, दुख, परेशानी आदि रूपी कोई पत्थर हम पर पड़ता है तो हमें तुरंत ईश्वर याद आते हैं और इन परेशानियों के निराकरण के लिए भगवान की ओर देखते हैं, उन्हें याद करते हैं। यदि हम लोग भी अपनी छोटी-छोटी खुशी में भगवान को याद करें और उनका धन्यवाद दें तो हम हमेशा भगवान के आशीर्वाद के नीचे ही रहेंगे।


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