आखिर चिन्हित हुआ चोपन गांव का अवैध खनन माफिया, लम्बे समय से चल रहा था अवैध बालू खनन का खेल

घनश्याम पांडेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)

चोपन । अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर जहां एक तरफ पुराने गैंगस्टरों में हड़कम्प मचा हुआ है वही नए अवैध खनन करने वाले माफियाओं के हौसले बढ़ते नजर आ रहे हैं । अवैध खनन के लिए सबसे महफूज माना जाने वाले चोपन व जुगैल क्षेत्र में अभी भी रात के अंधेरों में अवैध खनन बदस्तूर जारी है । इसी क्रम में सोमवार की शाम खनन विभाग को सूचना मिली कि चोपन गांव में खनन माफिया बेखौफ बालू का अवैध खनन कर रहे हैं ।

बताया जा रहा है कि नगर तथा आसपास के सोन नदी के तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन लंबे समय से फल-फूल रहा है । लोगों का आरोप है कि चोपन गांव में अवैध खनन को लेकर वन विभाग हमेशा से नरम रुख अपनाता रहा है । जिसके वजह से खनन माफियाओं के हौसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे थे । कोरोना के कारण हुए लॉक डाउन में तो चोपन गांव के खनन माफियाओं की चांदी ही कट रही थी । लोग घरों में कैद थे मगर चोपन गांव में अवैध खनन करने वाले लाल रेत ढो रहे थे ।

मगर सोमवार की शाम खनन माफियाओं के लिए बुरा समय साबित हुई । मुखबीर की सूचना पर खनन विभाग के जी0के0 दत्ता अपने सहयोगियों व स्थानीय लेखपाल के साथ चोपन गाँव में जा धमके और बालू के अवैध खनन का सघन निरीक्षण किया । साथ ही लगभग आध दर्जन चिन्हित स्थानों पर जा कर खदानों में अवैध खनन की पुष्टि करते हुए नापी भी की । वहीं मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि यहां वन विभाग की मिलीभगत से पूरी रात बालू का खनन होता है । जिससे खनन करने वाले किसी को कुछ नहीं समझते। वे हमेशा देख लेने की धमकी देते रहते हैं । जिसके बाद खनन सर्वेयर जी0के0 दत्ता ने स्थानीय थाने में पांच नामजद अवैध खननकर्ताओं के विरूद्ध तहरीर देकर सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करवाया दिया। एफआईआर दर्ज होते ही अवैध खनन करने वालों में हड़कम्प मच गया ।

इस पूरे मामले में लोगों ने वन विभाग के ईमानदारी की भी पोल खोल दी । सवाल यह उठता है कि वन विभाग जिस ईमानदारी से दूर इलाकों में जाकर रिस्क लेकर छापेमारी कर रहा है, वहीं चोपन वन कार्यालय से महज 3 किमी0 दूर अवैध खनन क्यों नहीं रोक सका।


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