बिजली कटौती के नाम पर अवैध कारोबारियों समेत समिति जगहों पर बिजली सप्लाई बना प्रश्न चिन्ह

अरविंद चौबे (संवाददाता)

– नगर पंचायत समेत ग्रामीण अंचलों में रात में विद्युत कटौती की किया विरोध

मारकुंडी । जहां इस समय लोग प्रकृति की मार से परेशान हैं । वहीं बिजली विभाग भी ऊपर से सितम ढा रहा है । इस समय कभी धूप-कभी बारिश से लोग परेशान हैं । जिससे उमस भी बढ़ गयी है । कोरोना की वजह से बुजुर्ग व बच्चों के निकलने पर सरकार ने मनाही कर रखी है । ऐसे में बिजली की आंखमिचौली से लोग ऊब चुके हैं ।

गुरमा विद्युत फीडर पर तैनात जिम्मेदार अधिकारी की घोर उपेक्षा व लापरवाही के चलते इन दिनों क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है ।विद्युत व्यवस्था का निस्तारण बरसो से लंबित पड़ा हुआ है । समस्या चाहे वह मीटर खराब की हो या विद्युत बिलों के गड़बड़ी की या फिर विद्युत सप्लाई की ।

लोगों का कहना है कि कोरोना काल में बिजली विभाग के कई कर्मचारी अपनी ड्यूटी कागजों पर ही कर रहे हैं ।

उपभोक्ताओं की शिकायत है कि मारकुंडी से लेकर सलखन, पटवध तक कुल 11 पेट्रोल पंप और एक क्रेशर प्लांट है । जहाँ बिजली व विभाग के लाइनमैन से लेकर बड़े कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक छोटी खराबी पर तत्काल सुनवाई करते हैं जबकि किसान व ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ता अपनी गुहार लगाते लगाते थक जाता है, फिर भी उसकी कोई सुनवाई नहीं होती । यही कारण है कि ग्रामीण सेक्शन की लाइट खोलकर केवल मारकुंडी, ओबरी, सलखन, पटवध में दी जाती है।
लोगों का आरोप है कि जब अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है तो ज्यादातर उनका मोबाइल स्विच ऑफ अथवा बीजी बताता है। अगर कभी उनका फोन लग भी गया तो उपभोक्ताओं को झूठी तसल्ली देकर टाल दिया जाता है।

विद्युत सिस्टम के बीमार होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सौभाग्य योजना के तहत लगभग एक वर्ष पूर्व हुए घरेलू कनेक्शनों का बिल हजारों में आ रहा है और उस बिल को जमा करवाने को लेकर दबाव भी बनाया जा रहा है । इतना ही नहीं ना देने पर कनेक्शन तक काट दिए जा रहे हैं। उपभोक्ता इतना भारी बिल देखकर आश्चर्यचकित है ।

हालांकि सूत्र बताते हैं विद्युत विभाग का बिल पुराने रेट के हिसाब से उनसे जमा करा लिया जाता है । कुल मिलाकर विद्युत विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से सिस्टम फेल नजर आ रहा है । हालांकि ग्रामीण विद्युत विभाग के बीमार सिस्टम की व्यक्तिगत व सामूहिक शिकायतें जिला स्तर से लेकर सीएम पोर्टल तक लगातार भेजी जा रही है लेकिन विभागीय कार्यशैली में बदलाव नजर नहीं आ रहा है।
बताया जा रहा है कि जो विभाग के खिलाफ विरोध कर रहा है उसके खिलाफ विभाग खुद चाबुक चला दे रहा ।


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