लैंपस पर यूरिया खाद नहीं मिलने से किसान दोगुने दाम पर लेने को विवश

आर के (संवाददाता)

-यूरिया खाद की भारी किल्लत


सागोबांध। भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है मगर इस कृषि प्रधान देश की किसानों की व्यथा काफी गंभीर है। प्रत्येक सरकार यह दावा करती है कि हमारी सरकार गरीब किसानों के लिए है मगर सच तो यह है कि किसान हमेशा इस जुमले से ठगा महसूस करता है। किसानों को सरकारी कृषि दुकान से नहीं बीज मिल पाता है और ना ही रासायनिक खाद। सरकार प्रत्येक वर्ष किसानों का फसल बीमा करती है मगर हकीकत सिफर है। मौके पर किसी भी कृषक को बीमा का लाभ नहीं मिल पाता। वर्तमान समय में मक्का ,धान ,बाजरा, सवा आदि फसलों में डालने हेतु यूरिया खाद की अति आवश्यकता है। क्षेत्र के सागो बांध , आरंग पानी, चैनपुर आदि सरकारी लैंपस पर यूरिया खाद अब तक दो बार आया है मगर वह 2 घंटे में ही समाप्त हो जाता है ।लैंपस क्षेत्र के दूर के किसान को लैंपस का यूरिया खाद दर्शन नहीं होता है। मजबूर होकर किसान 280 रुपए बोरी वाला खाद प्राइवेट मार्क का 400 से 450₹ तक लेने को विवश है। इतने ऊंचे दामों पर यूरिया खाद लेकर किसान किसी तरह अपने फसलों की हरियाली कर रहे हैं, ऐसे में बाजार के दुकानदारों की चांदी कट रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी महोदय का ध्यान आकृष्ट कराया है और मांग किया है कि सरकारी लैंपस पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध करवाएं।


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