इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सारे आभाव हैं समाप्त

श्रावण और पौष माह में शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी नाम से जाना जाता है। श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को पवित्रोपना एकादशी, पवित्रा एकादशी नाम से भी जाना जाता है। श्रावणी एकादशी के बारे में कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सारे आभाव समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

निसंतान दंपती पवित्रा एकादशी का व्रत करें तो उन्हें उत्तम गुणों वाली संतान की प्राप्ति होती है। इसलिए इसे पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है। संतान अगर बीमार रहती है तो यह व्रत अवश्य करना चाहिए। पवित्रा एकादशी पर भगवान श्री हरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करें। भगवान श्रीनारायण की पूजा करें। तुलसी पत्र अर्पित करें। दिनभर निराहार रहते हुए सायंकाल में पूजा करें। इस दिन पवित्र नदियों में दीपदान का भी विशेष महत्व है। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराएं। इस एकादशी पर किया गया व्रत धन, संपत्ति, ऐश्वर्य प्रदान करता है। संतान को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।


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