बाजारों में सजी राखी की दुकानें, नजर नहीं आ रहेे खरीदार

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षाबंधन 3 अगस्त को है। शहर के बाजारों में कई लोगों ने राखी की दुकानें भी सजा ली है, लेकिन इस बार इस त्योहार पर कोराेना का साया है। ऐसे में भाई की कलाई पर बांधी जाने वाली राखी का बाजार ठंडा पड़ा है। अभी रक्षाबंधन में 5 दिन बचे हैं। कई दुकानों पर राखियां सजाई जा रही है। इस बार बाजार में राखियों के नए डिजायन नहीं हैं और पिछले साल की तुलना में दामों में भी बढ़ोत्तरी भी है। राखी के विक्रेताओं चंदन केशरी, संदीप केशरी व राजेश गुप्ता ने बताया कि इस साल बाजार में राखी का बहुत ज्यादा स्टॉक नहीं है। रक्षाबंधन से तीन-चार माह पहले ही राखियों का स्टॉक तैयार करवाया जाता है। मगर, इस साल मार्च में लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन में सारे मजदूर अपने घर चले गए। अब जब अनलॉक हुआ है तो मजदूर ही नहीं हैं। अब थोड़ा बहुत माल तैयार हो रहा है।

इस वर्ष भारत-चाइना बॉर्डर पर तल्ख माहौल होने से ग्राहकों तथा व्यापारियों ने भी चाइनीज राखियों का बहिष्कार किया है। इस वर्ष पूरी तरह से देसी राखियाँ ही दुकानों पर देखने को मिल रही हैं।

वहीं रक्षाबंधन पर जो बहनें भाइयों को राखी बांधने जाने की सोच रही हैं, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे द्वारा संक्रमण को देखते हुए अभी सीमित ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। पहले उम्मीद थी कि रेलवे रक्षाबंधन के लिए स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर सकता है, लेकिन रेलवे ने अभी तक स्पेशल ट्रेनों की घोषणा नहीं की है, ऐसे में माना जा रहा है कि स्पेशल ट्रेनें नहीं चलेंगी। जबकि रोडवेज में भी सीएम की तरफ से पूर्व की भाँति रक्षाबंधन स्पेशल बसें चलाने का कोई घोषणा अब तक नहीं की गई है। ऐसे में बहनों को दूसरे विकल्प चुनना होगा।


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