जानें कैसे, आप पर रहेगी हनुमान जी की कृपा

श्री हनुमान जी की कृपा पाने और उन्‍हें प्रसन्‍न करने के लिए यूं तो बहुत से स्‍तोत्र मंत्र प्रचचित हैं जिनमें हनुमान चालीसा भी प्रमुख है। इन सबमें सुंदरकांड हनुमान जी का सर्वाधिक तीव्र ऊर्जा वाला स्‍तोत्र है जो साक्षात श्री हनुमान जी का स्‍वरूप है। सुंदरकांड रामचरित मानस के सात काण्‍डों में से एक है जिसमें मुख्‍यत: श्री हनुमान जी का संपूर्ण चित्रण और भगवान श्रीराम के प्रति उनका समर्पण, भक्‍ति, बल एवं शौर्य का वर्णन है।

ज्‍योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार सुंदरकांड का पाठ करने के अद्भुत लाभ हैं। सामान्‍तय: शुभ अवसरों पर घर में सुंदरकांड का पाठ कराने की परंपरा है और यह बहुत ही शुभ परिणाम भी देता है। सुंदरकांड का पाठ करने से घर में सकारात्‍मक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्‍मक ऊर्जा नष्‍ट हो जाती है। जिस स्‍थान पर सुंदरकांड का पाठ होता है वहां किसी ना किसी सूक्ष्‍म रूप में श्री हनुमान जी साक्षात उपस्‍थित होते हैं और जहां हनुमान जी का स्‍वयं आएं वहां कोई भय-बाधा कैसे टिक सकती है। ऐसे में जब भी सुंदरकांड का पाठ होता है तो हनुमान जी स्‍वयं उपस्‍थित होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

यदि हम रोज सुंदरपाठ का पाठ करते हैं तो जीवन में सभी तरह के संकट एवं बाधाएं मिट जाती हैं। जब भी आपको ऐसा लगे कि चारों ओर से संकटों ने घेर लिया है तो नित्‍य-प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें। जो लोग रोज सुंदरकांड का पाठ करते हैं उनके पास कभी भी कोई नकारात्‍मक ऊर्जा नहीं आती और जीवन में आने वाले कष्‍ट स्‍वत: दूर हो जाते हैं। दुर्घटनाओं से रक्षा होती है। शत्रु बाधा परेशान नहीं करती। सुंदरकांड का पाठ करने से साढ़ेसाती और मारकेश की दशा के दुष्‍प्रभाव भी क्षीण पड़ जाते हैं। सुंदरकांड का पाठ करने से निश्‍चित रूप से शुभ परिणाम मिलेंगे और हनुमान जी आपको स्‍वयं संकटों से किसी ना किसी रूप में बाहर निकालकर ले जाएंगे। मंगलवार और शनिवार को प्रात: एवं सांयकाल में जब भी सुंदरकांड का पाठ करें तो उस समय मंदिर में धूप-दीप जलाकर श्रीराम का ध्‍यान और हनुमान जी का आह्वान करके इसकी शुरुआत करें।

नोट:
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)


अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
error: Content is protected !!