जिस नगर में दो मंजिला मकान को दिया गया शहरी आवास, वहां चुर्क का लल्लन क्यों है अपात्र, पढ़ें पूरी स्टोरी

अंशु खत्री/दिलीप श्रीवास्तव (संवाददाता)

■ बारिश में भरभरा कर गिर गया लल्लन के मिट्टी की कोठरी, लेकिन बच गयी सबकी जान

■ बारिश के कारण हुआ हादसा, मगर बड़ा हादसा टला

■ घटना के वक्त कच्चे मकान में सोए थे लगभग 9 लोग

■ नहीं पहुंचा लेखपाल व नगर के हुक्मरान

■ लल्लन के साथ हुई घटना से लोगों में नाराजगी, की जांच की मांग

■ लल्लन का बड़ा आरोप, आवास के लिए मांगे गए थे कमीशन

■ मजदूरी कर जीवन जी रहा लल्लन का पूरा परिवार

चुर्क । हर गरीब का घर पक्का होने की उम्मीद लिए एक गरीब परिवार वर्षों से इंतजार करते – करते न सिर्फ थक चुका है बल्कि कल परिवार की जान भी जाने से बच गया ।
शनिवार को बारिश की वजह से जहां हर कोई अपने घरों में दुबका पड़ा था वहीं वार्ड नम्बर 3 का एक परिवार किसी तरह अपने पूरे परिवार के साथ मिट्टी के घर में रह रहा था । लेकिन भगवान को भी शायद मिट्टी के घर में उसका रहना भी नागवार गुजरा और तेज बारिश के कारण वार्ड नम्बर 3 निवासी लल्लन मल्लाह के कच्चे घर की दीवार भरभरा कर ढह गया । गलीमत यह था कि कोई हताहत नहीं हुआ । जबकि उस समय लल्लन मल्लाह का पूरा परिवार घर पर सो रहा था ।

आपको बतादें कि चुर्क नगर पंचायत क्षेत्र में लोगों को आवास रेवड़ी की तरह बांटा गया लेकिन जरूरत मन्द को आज तक आवास नहीं मिल सका ।

अब आवास क्यों नहीं मिल सका, वह भी लल्लन मल्लाह बताते हैं कि वह बहुत गरीब है, किसी तरह वह और उसका बेटा मजदूरी कर परिवार का पेट भरता है । जब आवास की योजना आयी तभी से वह आवास पात्रता का फार्म भरता चला आ रहा है लेकिन नहीं मिल सका । लल्लन से जब यह पूछा गया कि आखिर सबको मिला तो उसे क्यों नहीं मिल सका, क्या कारण बतातें हैं ऑफिस वाले ? लल्लन का कहना है कि उससे 15 हजार की मांग की गई थी, लेकिन वह कहां से देता, इसलिए आज तक आवास से वंचित है ।

आपको बतादें कि लल्लन जिस कच्चे मकान में रहता है उसमें दो कोठरी है जिसमें लल्लन सहित उसकी पत्नी, दो बेटे व उसकी बहु तथा 4 बच्चे रहते हैं ।
घटना शनिवार रात की थी तो आसपास के लोग ही लल्लन की मदद के लिए आगे आये लेकिन सुबह बड़ी संख्या में लोग लल्लन के घर पहुंचे और सांत्वना दिया। वहां मौजूद लोगों ने क्षेत्र के लेखपाल को भी सूचना दिया लेकिन कोई नहीं आया । देर शाम तक लल्लन और उसका परिवार अपने चहेते चेयरमैन और ईओ का भी इंतजार करता रहा कि शायद हुक्मरान आएंगे तो कोई रास्ता निकलेगा । लेकिन अफसोस कि कोई नहीं आया । इस बात की चर्चा सुबह से लेकर देर शाम तक नगर में होती रही । आखिरकार गरीब असहाय लल्लन आज अपने पूरे परिवार के साथ मिट्टी के उसी घर में एक कोठरी में बैठे पड़े हैं ।

बहरहाल लल्लन कोई अकेला सख्स नहीं जो भ्रष्टाचार के सिस्टम का शिकार है, मगर सवाल यह उठता है कि आखिर नगर में पक्के दो मंजिले मकानों तक को शहरी आवास मिल गया तो लल्लन कैसे अपात्र बना हुआ है।


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