लेफ्ट कर्मनाशा नहर पर आश्रित किसान बदहाल

विनोद कुमार (संवाददाता)

* अभी तक मुख्य नहर के टेल तक नहीं पहुंचा पानी।

* धान रोपाई के पीक आवर में पूरी वेग से नहर चली ही नहीं।
* इंद्र देवता के सहारे लेफ्ट कर्मनाशा नहर।
* टेल के किसान आक्रोशित।
* कभी जमानियां तक जाता था लेफ्ट कर्मनाशा नहर का पानी।

शहाबगंज।क्षेत्र के किसानों की लाईफ लाइन कही जाने वाली लतीफ़ शाह बीयर से निकली लेफ्ट कर्मनाशा नहर सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के वजह से पूरी तरह पूरी तरह से फेल साबित हो रही है।धान की रोपाई का अंतिम चरण चल रहा है लेकिन अभी तक लेफ्ट कर्मनाशा नहर पूरी वेग से चली ही नहीं है।जिससे किसानों को इंजन का सहारा लेना पड़ रहा है।

धान की रोपाई के पीक आवर में सिंचाई विभाग नहर की सफाई करने में लगा है।हेड के आस-पास के गाँव के किसान तो किसी तरह बेड़ा बांधकर धान की रोपाई कर लिए लेकिन टेल के किसानों को खेतों तक पानी ले जाने में नाकों चने चबाना पड़ रहा है।

बुजुर्ग किसानों की माने तो अभी तक ऐसा नहीं हुआ है कि धान की रोपाई हो जाए और लेफ्ट कर्मनाशा नहर पूरी वेग से चली ही नहीं।टेल के किसान इंद्र देवता के तरफ निगाहें लगाए बैठे हैं।क्योंकि महंगे डीज़ल के कारण बहुत से किसानों के लिए इंजन के सहारे खेती करना सम्भव नहीं है।एक समय ऐसा था जब लेफ्ट कर्मनाशा नहर का पानी पूरी गति से गाजीपुर के जमानियां क्षेत्र तक जाता था।यहीं नहीं बीयर से पानी खुलने के एक-दो दिन बाद ही टेल के किसानों को पानी मिल जाता था।अब कांटा साइफन तक ही लेफ्ट कर्मनाशा नहर का पानी जाता है।

देखा जाय तो आधे से भी ज्यादा की दूरी कम हो गयी है।इसके बाद भी हेड के समीप पचवनियाँ तक ही पानी सही से पहुंच पाता है।कांटा साइफन तक पानी पहुंचाने में सिंचाई विभाग को एड़ी-चोटी एक करनी पड़ती है।किसानों की माने तो अभी तक इस सत्र में धान की नर्सरी लगाने के बाद अब तक कांटा साइफन तक पानी नहीं पहुंच सका है।जिसका कारण है नहर की सफाई का समय से न होना।सूत्रों की माने तो बीयर से अठारह चूड़ी लेफ्ट कर्मनाशा नहर में पानी खोला गया तो नहर का पानी पचवनियाँ के आगे पूरी गति से नहीं जा सका और बीयर पर नहर का गेज फुल बताने लगा।नहर का फुल गेज बताने का कारण था नहर में सेवार का होना होना।नहर फुल गेज बताने के कारण अधिकारियों को पानी बन्द करना पड़ा।स्थानीय किसानों के हो हल्ला करने पर थोड़ा खोला गया है लेकिन जब तक सफाई नहीं हो जाती टेल के किसानों को पानी मिलना मुश्किल है।जब मुख्य नहर के टेल पर ही पानी नहीं पहुंच सका है तो इससे निकली माइनरों की क्या हाल होगी?लेफ्ट कर्मनाशा नहर से निकली माइनरें ध्वस्त हो चुकी हैं तो कुलावों का कहीं आता-पता नहीं है।हजारों एकड़ खेती प्रभावित है।कांटा गाँव के किसान भूपेंद्र प्रताप सिंह व प्रधान अमरजीत सिंह कहते हैं कि कोरोना काल में किसान ही लोगों के लिए एकमात्र सहारा बनकर उभरा है सरकार भी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।लेकिन सिंचाई विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार किसानों को ले डूबेगा।

विशुनपुरा के किसान मंटू सिंह कहते हैं कि डेढ़-दो दशक पूर्व में जब नहर पूरी गति से चलती थी तो कांटा साइफन के पास नहर को पार करने की हिम्मत किसी को नहीं थी लेकिन भ्रस्टाचार ने पूरी तरह से नहर को खोखला कर दिया है।पानी के वेग का पता ही नहीं चलता है।मजदूर किसान मंच के जिला प्रवक्ता अजय राय कहते हैं कि सिंचाई विभाग जान-बूझकर रोपाई के पीक आवर में नहर की सफाई में लगा है।गर्मी के दिनों में जब नहर में सफाई करनी थी तो विभाग कुम्भकर्णी नींद सोया था जब किसानों को पानी की जरूरत है तो नहर कि सफाई की जा रही है।जिससे कि अधिक से अधिक पैसा खारिज किया जा सके।उन्होंने जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है।भाजपा नेता व किसानों की समस्या को लेकर संघर्ष करने वाले प्रेम नारायण सिंह उर्फ मंटू कहते हैं कि किसान के खेतों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है अगर ऐसा नहीं होता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही तय है।


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