बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस अधीक्षक का नया फार्मूला, पढ़ें पूरी खबर

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

– आत्महत्याओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से एसपी ने बनाया ‘आत्महत्या रोकथाम सहायता केंद्र’

– पुलिस ने जारी की दो हेल्पलाइन नम्बर

– पुलिस की अपील, अवसाद की स्थिति में एक बार जरूर हेल्पलाइन नम्बर पर करें बात

– लॉक डाउन के दौरान सोनभद्र लगभग 2 दर्जन आत्महत्या की घटित हुई घटनाएँ

– अब काम्बिंग व चौपाल के दौरान पुलिस अवसाद से ग्रसित लोगों को करेगी चिन्हित

– पुलिस अधीक्षक खुद करेंगे इसकी मॉनिटरिंग

सोनभद्र । फ़िल्म अभिनेता सुशांत सिंह की मौत ने न सिर्फ उसके घर वालों को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया । आज भी हर किसी के जेहन में बस एक ही सवाल है कि आखिर सुशांत ने यह कदम क्यों उठाया, जबकि उसके पास कोई कमी नहीं थी। इस पूरे गुत्थी को सुलझाने के लिए मुम्बई पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।

जनपद में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं देखते हुए सोनभद्र पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव ने आत्महत्या पर प्रभावी रोकथाम लगाने के उद्देश्य से ‘आत्महत्या रोकथाम सहायता केंद्र’ बनाया है। पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि सोनभद्र में लॉक डाउन के दौरान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं और यह आँकड़ा लगभग 2 दर्जन के आसपास पहुँच गया,जो उन्हें काफी परेशान करने लगा था ।

इसी को देखते हुए ‘आत्महत्या रोकथाम सहायता केंद्र‘ बनाने का निर्णय लिया गया है ताकि लोगों की जिंदगी को बचाया जा सके, क्योंकि मनुष्य जीवन बहुत अनमोल है और यूँ ही उसे खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

पुलिस अधीक्षक का मानना है कि आत्महत्या करने वाले लोग बिल्कुल एकाकी जीवन में चले जाते हैं और वे अपनी बात और परेशानी किसी से शेयर नहीं कर पाते। ऐसे में यह हेल्पलाइन नम्बर 05444252612, 9454417479 उनके लिए जीवन दायनी का काम करेगा । यदि किसी भी व्यक्ति को परेशानी है और वह नहीं सुलझ रहा है तो एक बार जरूर हेल्पलाइन नम्बर पर फोन कर अपनी समस्या बताये ताकि उसकी समस्या को सुनकर सुलझाया जा सके।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इसके अलावा पुलिस अब काम्बिंग व गांव में लगने वाले चौपाल के दौरान भी लोगों को आत्महत्या न करने की अपील भी करेगी साथ ही ऐसे लोगों को भी चिन्हित करेगी जो गांव में निराश व जीवन से खुद को हारा हुआ महसूस करते हैं। ताकि ऐसे लोगों की काउंसलिंग कराई जा सके और उन्हें एक बार फिर घर परिवार व समाज में लौटाया जा सके।

यूँ तो लॉक डाउन के दौरान आत्महत्या की घटना लगभग 2 दर्जन से अधिक है । मगर आत्महत्या के केस की बात करें तो जनपद न्यूज Live ने दो केस को लिया । जिसमें एक युवक तो एक अधेड़ था ।

केस नम्बर 1 –

31 मार्च को राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के हिनौता गांव मे शैलेंद्र उर्फ़ शेरू (27वर्ष) ने घर के पास आम के पेड़ मे फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। बताया जा रहा था कि लॉक डाउन के चलते काम धंधे पर नहीं जा पाने के कारण मानसिक रूप से परेशान चल रहा था।

केस नम्बर 2 –

वहीं 1 जुलाई को चोपन थाना क्षेत्र के गुरमुरा निवासी शिव प्रसाद गोड़ (54वर्ष) पुत्र स्व0 पतिराज गोड़ ने घर के बड़ेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बारे में जानकारी लेने पर पता चला कि लॉक डाउन के दौरान मृतक घर पर रहने के कारण मानसिक अवसाद से ग्रसित हो गया था।

कुल मिलाकर पुलिस का यह प्लान आत्महत्याओं की घटना को रोक पाने में कितना सफल हो पाती है यह तो आगे आने वाली रिपोर्ट में ही पता चल सकेगा लेकिन जिस तरीके से पुलिस अधीक्षक ने इस दिशा में पहल शुरू की है वह निश्चित तौर पर काबिले तारीफ है। क्योंकि इससे न सिर्फ अत्महत्या करने वाले व्यक्ति को एक विकल्प मिल जाएगा बल्कि उसकी जानकारी होते ही उसकी काउंसलिंग कराकर उसकी समस्याओं को हल भी करने का प्रयास किया जाएगा।


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