आर्थिक संकट में फंसे बच्चों के भविष्य निर्माता

सुरेश श्रीवास्तव (संवाददाता)

खुटार (शाहजहांपुर) । इस समय कोविड-19 वैश्विक महामारी के चलते पूरा देश संकट के दौर से गुजर रहा है । ऐसी विषम परिस्थितियों में देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी अदम्य कार्यशैली से जनता की हर तरह से मदद करने में लगे हुए हैं । स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ संकट के दौर में फंसे प्रवासियों को घर तक भिजवाने का कार्य किया है। इस सबके बावजूद प्राइवेट शिक्षकों की तरफ अभी तक सरकार ने कोई भी ध्यान नहीं दिया है । कोविड-19 महामारी के कारण मार्च में मान्यता प्राप्त विद्यालय बंद कर दिए गए थे । 4 मांह बीत जाने के बाद भी विद्यालय नहीं खुले । विद्यालयों द्वारा मार्च का वेतन देने के बाद अध्यापकों की छुट्टी कर दी गई थी । ऐसे में प्राइवेट शिक्षकों के आगे आर्थिक संकट खड़ा हो गया है । अब उन्हें यह नहीं सूझ रहा कि आखिर वे क्या करें । क्योंकि स्कूल खुलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे।

अधर में लटके हैं निजी विद्यालय संचालक

उपरोक्त समस्या से केवल शिक्षक ही चिंतित नहीं है वरन विद्यालय संचालक भी परेशान हैं । क्योंकि बच्चों के स्कूल ना जाने से अभिभावक भी फीस देने को तैयार नहीं है । ऐसी स्थिति में शिक्षकों को वेतन देने में विद्यालय संचालक असमर्थ दिखाई देते हैं । कहा जा रहा है कि विद्यालय संभवत सितंबर से खोले जा सकते हैं । ऐसी स्थिति में बंद समय की फीस अभिभावकों को देने में आनाकानी करना स्वाभाविक दिखाई देता है । सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि प्राइवेट शिक्षक 6 महीने का इंतजार ना करके भरण पोषण के लिए कोई दूसरा व्यवसाय भी चुन सकते हैं। ऐसी स्थिति में जव कभी स्कूल खुलेगा तो विद्यालय प्रबंधकों को शिक्षक मिलना भी मुश्किल हो सकता है। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने इस समस्या का ध्यान सरकार की तरफ आकृष्ट कराया है ।


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