कोरोना संकट में नहीं चल रही बसें इसलिए टैक्स देना भी मुनासिब नहीं

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । कोरोना संकट में बसों के पहिए थमे रहे, लेकिन टैक्स बकाया हो गया। संचालन किए बगैर ही टैक्स का जुगाड़ करना मालिकों के लिए मुश्किल हो रहा है। मामला निजी बस ऑपरेटर्स से जुड़ा हुआ है। लॉक डाउन की अवधि में रोडवेज के साथ ही निजी बसें भी रूकी रही। निजी बस ऑपरेटर राज्य सरकार से छह माह का टैक्स माफ करने तथा अगले छह माह का टैक्स 50 फीसदी किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सड़क पर दौड़ाए बगैर ही टैक्स चुकाना मुश्किल हो रहा है। अब संचालन शुरू हो चुका है, लेकिन यात्री भार कम मिल रहा है। बिना कमाई किए टैक्स का पैसा जमा कराना मुनासिब नहीं है। छह माह का टैक्स माफ किया जाए तो बस संचालकों को राहत मिल सकती है।

इसे लेकर आज प्राइवेट बस आपरेटर्स कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष वेदप्रकाश पांडेय के नेतृत्व में निजी बस मालिकों ने एआरटीओ प्रशासन को आठ सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। समिति के जिलाध्यक्ष ने कहा कि सभी प्रकार के यात्री वाहनों, बसें आदि का माह अप्रैल से सितंबर तक छह माह का टैक्स माफ किया जाए, इसके बाद से अगले छह माह का टैक्स 50 फीसद किया जाए। सभी प्रकार के यात्री वाहनों के चालकों को कम से कम पांच हजार प्रतिमाह के हिसाब से सांत्वना राशि के रूप में दी। सभी प्रकार के यात्री वाहनों को परमिट, फिटनेस की वैधता भी समाप्ति तारीख से बगैर कोई शुल्क लिए आगे बढ़ाए जाने समेत अन्य मांगों को रखा। इस मौके पर प्रमोद, ओम प्रकाश, सत्य प्रकाश आदि मौजूद रहे।


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