मदरसा और स्कूल बुलाने के आदेश पर शिक्षकों में आक्रोश

फ़ैयाज़ खान मिस्बाही(ब्यूरो)

ग़ाज़ीपुर। ना ही स्कूल और मदरसे में सेनेटाईज़र का इंतेज़ाम है और न ना ही हैंडवाश के लिये साबुन का इंतेज़ाम है,और न ही इसके लिये कोई अलग से फंड अभी तक मुहैय्या कराया जा सका।बस स्कूल और मदरसों को खोलने की जल्दी दिख रही है।स्कूलों में छिड़काव, सेनेटाइजर एवं हैंडवाश या साबुन के लिए कोई फंड उपलब्ध नहींमाध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य चौधरी दिनेश चंद्र राय ने शिक्षामंत्री को मेल किया। इस मेल में उन्हें शिक्षामंत्री को अवगत कराया कि सरकार से स्कूल खोलने की छूट मिलने के बाद से शिक्षकों में चिंता का माहौल बना हुआ है। शिक्षकों का इस मुद्दे पर दो टूक कहना है कि महामारी से निजात मिलने और वैक्सीन तैयार न होने तक स्कूल बंद होने चाहिए। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में सेनेटाइजर, हैंडवाश, साबुन तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। अगर सरकार गारंटी लेती है, तभी स्कूल खुले। उन्होंने कहा है कि सरकार की ओर से विभाग को स्कूल खोलने की छूट तो मिल गई है, लेकिन शिक्षकों को संक्रमण से बचाए रखना बड़ी चुनौती है। स्कूल के भीतर प्रवेश करने से पहले कई शिक्षक लम्बा सफर तय करते हैं। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल भी करते हैं। ऐसे में अगर एक भी शिक्षक स्कूल में संक्रमण लेकर आता है तो दूसरे कई शिक्षकों और स्कूल के स्टाफ में भी संक्रमण का खतरा बना रहेगा। आगे उन्होंने कहा कि स्कूल के भीतर प्रवेश करने तक शिक्षकों की पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। स्कूलों के शिक्षक एवं कर्मचारियों को भी कोरोना वॉरियर्स घोषित करने के साथ ही बीमा का लाभ दिया जाए। WORK FROM HOME के तहत ही छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने की अनुमति दी जाए। इन दिनों कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। स्कूलों या मदरसों में छिड़काव, सेनेटाइजर एवं हैंडवाश या साबुन के लिए कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे स्कूलों पर सुरक्षित रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक स्कूल खोले जाने के लिए कोई आधिकारिक घोषणा तक नहीं हुई है।इन सब चीजों के बावजूद स्कूल और मदरसों को खोलना किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है।


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