सफलता की इमारत चढ़ने के लिए अपनाएं ये तीन मंत्र, जानें

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हम अपने आसपास अपने मन के लोगों से घिरे रहना पसंद करते हैं। ऐसे लोग, जो मन और आत्मा को सुकून देते हैं। सरलता की हमारी चाह बढ़ने लगती है।

नई तरह से सोचने का हुनर सीखें:
हमें अपनी योग्यताओं और क्षमताओं को किसी दायरे में बांधने से बचना होगा। ऐसा तब होगा, जब हम अपनी कमजोरियों पर ही नहीं, बल्कि उनसे उबरने के रास्तों पर भी विचार करेंगे। यहीं से हमारी तरक्की का रास्ता खुलता है। लेखक मारियानने विलियम्सन ने कहा है, ‘आप किसी भी विधा के महारथी बनें, पर उसके लिए आपको कुछ भी नए तरीके से सोचने का हुनर सीखना होगा।’

जो जैसा है, उसे वैसा रहने दें:
कई बार हम दूसरों को जरूरत से ज्यादा परखने लगते हैं तो कई बार छोटी-छोटी बातों से प्रभावित होकर बड़े फैसले कर बैठते हैं। किसी भी संबंध में जल्द राय बनाने की आदत भारी असर डालती है। मोटिवेशनल स्पीकर राजीव विज कहते हैं, ‘जो जैसा है, उसे वैसा रहने दें। आप अपनी जिंदगी जिएं। अपने कौशल पर भरोसा कर आगे बढ़ें।’

शॉर्टकट नहीं आएंगे काम:
जिंदगी में देर तक शॉर्टकट काम नहीं आते। आसानी से मिल जाने वाली चीजें भी तभी टिक पाती हैं, जब हम उनकी कीमत समझते हैं और लगातार खुद को उस लायक बनाने की कोशिश करते हैं। सफलता किसी एक दिन के प्रयास से नहीं, रोज की कोशिशों से मिलती है। अमेरिकी लेखक जॉन सी. मैक्सवेल कहते हैं, ‘सफलता की इमारत ईंट दर ईंट जोड़कर ही बुलंदी तक पहुंचती है।’


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