गुरमुरा में आयुर्वेद चिकित्सीय सुविधा शुरू, डॉक्टर ने सम्भाला पदभार

संजय केसरी (संवाददाता)

डाला । सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चोपन के अंतर्गत नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गुरमुरा में राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय डाला से सिफ्ट कर दिया गया था जिसमें डॉ नागेंद्र सिंह थे परन्तु उनके स्थानांतरित होने के बाद लगभग सालभर यह अस्पताल फार्मासिस्ट के देखरेख पर ही चल रहा था जबकि मरीज यहाँ दूर दराज से आते हैं। आपको बतादूँ कि यहाँ जर-बुखार, गठियाबाद, सर्दी-जुकाम, पेट सम्बंधित एवं और भी कई प्रकार के रोगों का इलाज किया जाता हैं।

आज राजकीय आर्युवेदिक चिकित्सालय में डॉ अपूर्व प्रियदर्शी ने अपना पदभार ग्रहण किया।
डॉ प्रियदर्शी ने पदभार ग्रहण करने के बाद अस्पताल के कम्पाउंड में वृक्षारोपण भी किया उन्होंने बताया कि आज पूरा देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा हैं सरकार भी अपील कर रही हैं और हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि ऐसे में सोशल डिस्टेंसिग का पालन करें और खुद बचें और और को भी बचाए।

उन्होंने वृक्षारोपण के बाद लोगों को एक संदेश भी दिया कि वृक्ष लगाकर उन्हें उगाना इसका प्रयोजन करना है। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना। मानव के जीवन को सुखी, सम्रद्ध व संतुलित बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण का अपना विशेष महत्व है।

वही नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के फार्मासिस्ट सतेंद्र सिंह के नेतृत्व में वृक्षारोपण किया गया और उन्होंने भी पौधरोपण के ऊपर एक संदेश दिया कि हमारे देश भारत की संस्कृति एवं सभ्यता वनों में ही पल्लवित तथा विकसित हुई है यह एक तरह से मानव का जीवन सहचर है वृक्षारोपण से प्रकृति का संतुलन बना रहता है वृक्ष अगर ना हो तो सरोवर (नदियां ) में ना ही जल से भरी रहेंगी और ना ही सरिता ही कल कल ध्वनि से प्रभावित होंगी वृक्षों की जड़ों से वर्षा ऋतु का जल धरती के अंक में पोहचता है, यही जल स्त्रोतों में गमन करके हमें अपर जल राशि प्रदान करता है वृक्षारोपण मानव समाज का सांस्कृतिक दायित्व भी है, क्योंकि वृक्षारोपण हमारे जीवन को सुखी संतुलित बनाए रखता है। वृक्षारोपण हमारे जीवन में राहत और सुखचैन प्रदान करता है।मौके पर विपिनबिहारी, प्रितेश, सुख्खू प्रसाद,कमलाकांत मौजूद रहे।


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