दो गज की दूरी मास्क हैं जरूरी,अपने दिनचर्या का बना ले हिस्सा

संजय केसरी (संवाददाता)

-नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में बढ़ी सुविधाएं

-आदिवासी ग्रामीणों को भटकना नही
पड़ेगा इलाज के लिए

-प्रसव की भी पूरी सुविधा

डाला। सरकार इस कोरोना वैश्विक महामारी से बचाव का इलाज केवल उपाय ही है। यदि सोशल डिस्टेंसिग व मॉस्क लगाने को आदत में शुमार किया जाए तो संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसलिए आमजन दो गज की दूरी व मॉस्क जरूरी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें।
लोगों की जागरूकता ही कोविड-19 संक्रमण से बचाव का अचूक हथियार बन सकता है। प्रशासन व सरकार द्वारा कोरोना से बचाव संबंधी हिदायतों व सावधानियों का पूरी जिम्मेवारी के साथ पालन करें। लोगों की कोरोना के प्रति थोड़ी सी लापरवाही स्वयं को व दूसरों को भी खतरे में डाल सकती है। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए जारी हिदायतों का अनुपालन दृढ़ता से करें।

ऐसा ही इस वैश्विक महामारी से बचने के लिए नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गुरमुरा में देखने को मिला जहाँ इससे बचने के लिए आदिवासी ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा हैं और बताया जा रहा कि अपने आप को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से कैसे बचाएं। कोविड हेल्प डेरक के तहत दो गज की दूरी ,मास्क लगाना हैं जरूरी सरकार द्वारा चलाया गया इस श्लोगन को नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आदिवासी ग्रामीणों को बताया जा रहा हैं।

डॉ सुनील कुमार (चिकित्सा प्रभारी) ने बताया कि जिस तरह से आज पूरा देश इस वैश्विक महामारी से परेशान हैं और दिन प्रतिदिन कोरोना पॉजीटिव की संख्या बढ़ रही हैं जिसको देखते सरकार द्वारा बताएं गए नई दिशाओं का लोग पालन करें खुद बचें और अपने परिवारजनों को बचाएं दो गज की दूरी एक दूसरे से बनाकर रहे और कही बाहर आये जाए नही क्योंकि सोशल डिस्टेंसिग बहुत जरूरी हैं,तभी इस कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को हराया जा सकेगा।

डॉ निशांत बानो ने आदिवासी ग्रामीण महिलाओं को भी जागरूक करने का कार्य बहुत ही दृढ़ विश्वास के साथ करते नजर आयी उन्होंने ने बताया कि इस महामारी में सोशल डिस्टेंसिग तो जरूरी हैं ही साथ साथ पानी को उबाल कर पिए और बाजार की बनी सामानों का सेवन कम से कम करें ऐसे स्थानों पर न जाएं जहाँ भीड़ की संख्या ज्यादा हो क्योंकि इससे दूरी बनाने पर ही आप इस वैश्विक महामारी से बच सकेंगे। नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में जो भी ग्रामीण इलाज के लिए पहुंच रहे हैं उनकी स्क्रीनिंग जांच भी की जा रही हैं।

आपको बतादूँ कि यह क्षेत्र बाहुल्य आदिवासी क्षेत्र हैं और लगभग 15 किलोमीटर से दूर के मरीज यहाँ इलाज के लिए आते हैं और इस स्वास्थ्य केन्द्र पर बढ़ी सुविधाएं यहाँ के आदिवासी ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होंगे क्योंकि यहाँ के आदिवासी ग्रामीण रोजमर्रा की जीवन यापन करते हैं अगर उनके घर मे कोई बीमार हो गया तो उनकी अर्थव्यवस्था चरमरा जाती हैं ऐसे में यहाँ सुविधा बढ़ जाना इस क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीणों के लिए वरदान साबित होगा।

अब नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर बिजली की सुविधा हो गई हैं और दो किलोवाट का सोलर भी लग गया जिससे अब बिजली की के कारण जो दिक्कतें आती थी उससे अब स्वास्थ्य केन्द्र को निजात मिल गया हैं। बिजली की सुविधा हो जाने से यहाँ के ग्रामीणों को बहुत लाभ मिल रहा हैं क्योंकि अब मलेरिया,टाइफाइड, टीवी,और भी कई तरह जाँच के लिए आदिवासी ग्रामीणों को अब बाहर मोटी रकम नही देनी पड़ेगी। अब इस नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर प्रसव की सुविधा हो गई हैं और 24 घण्टे 108न0 एम्बुलेंस गुरमुरा स्वास्थ्य केन्द्र के कम्पाउंड में खड़ा रहता हैं जिससे यहाँ के मरीजों के लिए बहुत बड़ी सुविधा उपलब्ध हो गई हैं जिसकी चर्चा आस पास के गांवों तक चल रही हैं और यहाँ के आदिवासी कह रहे हैं कि अब हमलोगों को इलाज के लिए कही भटकना नही पड़ेगा अब इलाज के लिए सरकार ने हम आदिवासियों के लिए सुविधा मुहैया करा दी हैं। मौके पर सतेन्द्र सिंह(फार्मासिस्ट),प्रितेश सिंह,विपिन बिहारी, सरोज,अशलम अंसारी, पशुपतिनाथ उपाध्याय,रामप्रवेश सोनी, शुख्खू,कमला इत्यादि मौजूद रहे।


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